सपा कांग्रेस
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मध्य प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच हुए एक सियासी घटनाक्रम ने देश की सियासत को गर्म कर दिया है। सपा मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ छह सीटों पर गठबंधन करना चाहती थी लेकिन यह गठजोड़ कांग्रेस ने स्वीकार नहीं किया।
गठबंधन न होने के बाद दोनों दलों में तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तो 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बर्ताव का पलटवार करने तक की बात कह दी। सिसिलेवार तरीके से दोनों ओर से पलटवार हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस-सपा में विवाद की शुरुआत कैसे हुई? सपा की तरफ से क्या बयान दिए गए? कांग्रेस के नेताओं ने क्या पलटवार किया? क्या इस विवाद की आंच इंडिया गठबंधन तक जाएगी? आइये समझते हैं...
पहले जानते हैं कि कांग्रेस-सपा में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद की शुरुआत सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की असफलता से हुई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा को छह सीटें देने के बारे में बातचीत इंडिया गठबंधन के मंच से शुरू हुई थी। इनमें से सपा बिजावर सीट पर सपा ने पिछले चुनाव में जीती थी, जबकि अन्य सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी।
सपा के प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने वार्ता की कमान संभाली। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कमलनाथ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बीच भी बातचीत हुई। सूत्र बताते हैं कि तय हुआ था कि नवरात्र में जारी होने वाली कांग्रेस की पहली सूची में ही सपा प्रत्याशियों के भी नाम होंगे।
इस बारे में आधिकारिक घोषणा हो पाती उससे पहले 18 अक्तूबर की रात को कांग्रेस ने 85 प्रत्याशियों वाली अपनी दूसरी सूची जारी कर दी। इसके साथ ही कांग्रेस ने आमला सीट को छोड़कर बाकी सभी 229 सीटों पर उम्मीदवार तय कर दिए। इस सूची में वो सीटें भी थीं जिनको लेकर कांग्रेस और सपा में गठबंधन की चर्चा हुई थी। इसका सीधा मतलब था कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन को तैयार नहीं हुई और उसने सभी सीटों पर अपने ही उम्मीदवार उतार दिए। गठबंधन का फेल होना ही मौजूदा विवाद की असली वजह बनी।
सपा मुखिया अखिलेश यादव
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गठबंधन नहीं होने के बाद क्या हुआ?
गठबंधन की बात न बनने पर 19 अक्तूबर को पहली बार अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया आई। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सपा के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस ने सपा को मध्यप्रदेश में धोखा दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छह सीटों को छोड़ने का आश्वासन दिया था लेकिन एक भी सीट नहीं छोड़ी। मजबूरी में सपा अपने मजबूत प्रत्याशियों को इन सीट पर उतारेगी।
उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन को पहले ही स्पष्ट कर देना चाहिए था कि तालमेल केवल लोकसभा चुनाव के लिए है न कि विधानसभा चुनाव के लिए। सपा प्रमुख ने कहा कि समय आने पर जब दिल्ली गठबंधन (लोकसभा चुनाव) होगा तो हम भी वही व्यवहार करेंगे जो हमारे साथ मध्य प्रदेश में किया गया।
अजय राय
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'दिल्ली' वाले बयान का पलटवार
19 अक्तूबर को शाम में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यूपी में 80 सीटों पर तैयारी कर रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि घोसी में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया। अगर पार्टी घोसी से लड़ती तो हो सकता है कि सपा यह सीट हार जाती।
कार्यक्रम से पहले संवाददाताओं से बात करते सपा मुखिया अखिलेश यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
अजय राय के बयान का जवाब देते-देते चिरकुट कह दिया
बयानबाजी का सिलसिला यहीं नहीं रुका अखिलेश यादव ने इस बार अजय राय के बयानों पर प्रतिक्रिया दी और व्यक्तिगत हमला कर दिया। सपा प्रमुख ने कहा कि वह इंडिया की किसी मीटिंग में नहीं थे। वहां गठबंधन को लेकर क्या बातें हो रही हैं उन्हें नहीं मालूम। कांग्रेस को ऐसे चिरकुट नेताओं को इस मसले पर बयान देने से रोकना चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय
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अजय राय ने भी व्यक्तिगत हमला किया
दोबारा अखिलेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय राय ने कहा कि उन्होंने कभी भी सपा के किसी भी नेता के लिए असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया। लेकिन, जो लोग (अखिलेश यादव) अपने पिता का सम्मान नहीं कर पाए, उनसे बेहतर भाषा की क्या उम्मीद की जाए? जबकि हमारी संस्कृति में पिता और गुरु को भगवान के समान माना गया है।
कमलनाथ (फाइल फोटो)
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कमलनाथ की एंट्री हुई
मध्य प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच टिकटों का बंटवारा नहीं होने से दोनों ही पार्टियों में खटास बढ़ती ही गई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के मध्य प्रदेश कांग्रेस पर तीखे हमले के बाद मीडिया से चर्चा में कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल बहुत अच्छा है, हम उम्मीद से भी बेहतर संख्या से जीतेंगे। अखिलेश यादव की नाराजगी के सवाल पर कमलनाथ बोले, 'अरे छोड़ो अखिलेश-वखिलेश को'।
अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव
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रामगोपाल यादव के बयान से तल्खी और बढ़ी
सपा अध्यक्ष पर पूर्व सीएम कमलनाथ समेत कांग्रेस नेताओं के बयानों के बारे में सपा सांसद रामगोपाल यादव ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'हमें इनपर कुछ नहीं कहना है, ये छुटभइये नेता हैं'।
बैठक
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तो इस बयानबाजी का असर इंडिया गठबंधन पर पड़ेगा?
बयानबाजी का सिलसिला रुकने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इससे सवाल इंडिया गठबंधन की एकता पर हो रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तल्खी का असर इंडिया गठबंधन पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक राखी बख्शी कहती हैं, 'अगर आप सोच रहे थे कि ये दल बहुत गर्मजोशी से एकसाथ आ जाएंगे तो जमीन पर ऐसा नहीं दिख रहा है। जिनकी अपनी सीटों पर क्षेत्रीय ताकत है, उसे वो कैसे जाने दे सकते हैं? आगे क्या होगा, यह देखना होगा, लेकिन अभी तो यह परेशानी की शुरुआत दिखाई दे रही है।'
अन्य राजनीतिक विश्लेषक प्रेम कुमार कहते हैं, 'यह अप्रिय स्थिति है, लेकिन मूल बात यह है कि क्या अखिलेश को लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है? अगर वो इस बात को समझ रहे हैं तो उन्हें इंडिया गंठबंधन को छोड़ देने का एलान कर देना चाहिए था, लेकिन वे ऐसा नहीं कह रहे हैं। जहां तक इंडिया गठबंधन की बात है तो वह एक 'थ्योरी ऑफ कंपल्शन' के कारण बना है। अधिकतम नतीजे मिलें, यह लड़ाई उसके लिए है।'