प्रसूताओं की मौतें : नाइजीरिया के बाद भारत दूसरा
भारत में हर 290 प्रसूताओं में से एक की प्रसव के दौरान मौत हुई। भारत में 35 हजार प्रसूताओं की मौतें विश्व में दूसरी सर्वाधिक हैं। नाइजीरिया में 67 हजार मौतें हुईं थीं।
उम्मीद भी...क्योंकि तेजी से हुआ सुधार
भारत ने 2000 से 2017 के दौरान इन मौतों की संख्या 61 प्रतिशत घटाई। 2000 में प्रति एक लाख 370 प्रसूताओं की प्रसव के दौरान मौत हो रही थी, जिसे 145 तक लाया गया है। एसडीजी के लिहाज से यह अब भी दोगुने से अधिक है।
बच्चों की मौतें : नाईजीरिया से ज्यादा
पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आधी मौतें भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो और इथियोपिया में हुईं। नाइजीरिया में 8.66 लाख और भारत में 8.82 लाख मौतें हुईं।
यहां भी किया सुधार
भारत में सर्वाधिक बच्चों की मौतों की वजह अधिक जनसंख्या भी है। 1990 के मुकाबले हमने काफी सुधार किया है, उस वर्ष डब्ल्यूएचओ ने यहां 34.17 लाख बच्चों की मौतों का आकलन किया था। आज हर एक हजार बच्चों में 37 की मौत पांच वर्ष आयु पूरी करने के पहले हो रही है। 1990 में यह संख्या 126 थी।