बयान लेना कोर्ट पर छोड़ दें
आपको गवाही का पूरा हिस्सा पढना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हिन्दू पक्ष की ओर से उस बयान का हवाला नहीं दिया गया तो इसका मतलब यह नहीं कि अदालत कोई सवाल नहीं पूछ सकता। जस्टिस भूषण ने कहा कि गवाही का यह हिस्सा हाईकोर्ट के फैसले में है। इस पर धवन ने कहा कि इस तरह के बयान विश्वासयोग्य नहीं हो सकते। जवाब में जस्टिस भूषण ने कहा कि गवाहों के बयान को कैसे लेना चाहिए, यह काम अदालत पर छोड़ देना चाहिए। इस पर धवन ने कहा, माई लॉर्ड का यह तरीका मुझे सख्त लगा।
जिसके बाद जस्टिस चंद्रचूडृ ने बीच बचाव करते हुए कहा कि अदालत इसलिए सवाल पूछती है कि जिससे कि चीजें साफ हो जाए। उन्होंने कहा कि हम चीजों को बेहतर तरीके से समझने के लिए ऐसे सवाल करते हैं। जिसके बाद धवन ने पीठ से माफी मांग ली।
धवन को धमकी भरा पत्र लिखने वाले बुजुर्ग ने मांगी माफी
सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को धमकी भरा पत्र लिखने वाले 88 वर्षीय पूर्व सरकारी अधिकारी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग ली। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने धवन द्वारा दायर अवमानना याचिका को बंद कर दिया।
चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी एन षणमुगम की ओर से पेश वकील से कहा कि आखिर उनके मुवक्किल ऐसा क्यों कर रहे हैं। जवाब में वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने पत्र के लिए खेद व्यक्त किया है। वहीं राजीव धवन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि वह भी पूर्व अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। जिसके बाद पीठ ने बुजुर्ग अधिकारी केखिलाफ मुकदमा खत्म कर दिया। पीठ ने बुजुर्ग को दोबारा ऐसा नहीं करने के लिए कहा है।