Maratha Quota: मराठा आरक्षण आंदोलन के चेहरे मनोज जरांगे कौन हैं? किस मांग को लेकर दे रहे थे धरना, जानें सबकुछ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 27 Jan 2024 06:07 PM IST
सार
Manoj Jarange Patil: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे पाटिल हैं। वह 2011 से आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। पिछले साल अगस्त में मनोज ने महाराष्ट्र में मराठाओं के लिए आरक्षण की मांग को लेकर धरना शुरू किया था।
आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे
- फोटो : AMAR UJALA
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा विरोध समाप्त हो गया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जरांगे ने शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में आरक्षण को लेकर किए जा रहे अनशन को खत्म कर दिया। जरांगे की सभा को संबोधित करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि मैंने जो वादा किया था, वो निभाया है। जरांगे का धरना खत्म होते ही महाराष्ट्र सरकर ने मराठा समुदाय के लोगों के रक्त संबंधियों को कुनबी की मान्यता देने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना उनके लिए लागू होगी जिनके पास कुनबी जाति के रिकॉर्ड पाए गए हैं।
आखिर कौन हैं मनोज जरांगे? मराठा आरक्षण पर अभी क्या हुआ है? प्रदर्शनकारियों की मांग क्या रही है? इस पर सरकार का क्या फैसला लिया है? आइये समझते हैं...
आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे
- फोटो : AMAR UJALA
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा विरोध समाप्त हो गया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जरांगे ने शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में आरक्षण को लेकर किए जा रहे अनशन को खत्म कर दिया। जरांगे की सभा को संबोधित करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि मैंने जो वादा किया था, वो निभाया है। जरांगे का धरना खत्म होते ही महाराष्ट्र सरकर ने मराठा समुदाय के लोगों के रक्त संबंधियों को कुनबी की मान्यता देने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना उनके लिए लागू होगी जिनके पास कुनबी जाति के रिकॉर्ड पाए गए हैं।
आखिर कौन हैं मनोज जरांगे? मराठा आरक्षण पर अभी क्या हुआ है? प्रदर्शनकारियों की मांग क्या रही है? इस पर सरकार का क्या फैसला लिया है? आइये समझते हैं...
मनोज जरांगे
- फोटो : Social Media
कौन हैं मनोज जरांगे?
आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की।
मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खींचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी।
बताया जाता है कि मनोज जरांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।
मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो : AMAR UJALA
पिछले साल अगस्त में लाठीचार्ज के बाद बिगड़ी थी स्थिति
29 अगस्त 2023 को शुरू हुआ आंदोलन जालना में पुलिस लाठीचार्ज के बाद हिंसक हो गया। 1 सितंबर 2023 को जिले के सराटी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इसके साथ ही पुलिस ने घटना को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए।
पुलिस की कार्रवाई के चलते राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार भी बैकफुट पर आ गई। खुद राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने प्रदर्शनकारियों से माफी मांगी और कहा कि सरकार को पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर खेद है।
इधर हिंसा के बाद भी आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। इस बीच शिंदे सरकार के प्रतिनिधियों ने आंदोलन के अगुआ जरांगे के साथ कई दौर की बात की। वार्ताओं के बाद 7 सितंबर 2023 को महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की कि मराठवाड़ा क्षेत्र के सभी मराठों को निजाम-कालीन कुनबी जाति के प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। 1960 से पहले मराठा समाज को कुनबी समाज का प्रमाणपत्र दिया जाता था लेकिन संयुक्त महाराष्ट्र का गठन होने के बाद यह प्रमाण पत्र मिलना बंद हो गया।
मराठा आरक्षण
- फोटो : AMAR UJALA
40 दिन की समयसीमा में भी नहीं बनी बात
जरांगे द्वारा सरकार के समझौते को ठुकराए जाने के बाद आगे के कदमों पर चर्चा के लिए 11 सितंबर 2023 को सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसके साथ ही सरकार ने मराठा समुदाय के सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने की मांग को लेकर न्यायाधीश संदीप शिंदे (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल का गठन कर दिया। 14 सितंबर 2023 को मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने भूख हड़ताल वापस ले ली। सीएम शिंदे ने खुद धरना स्थल वाले अंतरवाली सरती गांव पहुंचकर जूस पिलाया। मनोज ने सरकार को मराठाओं को आरक्षण देने के लिए 40 दिन की समय सीमा दे दी।
मराठा आरक्षण लागू करने के लिए दी गई समय सीमा 24 अक्तूबर 2023 को खत्म हो गई। लिहाजा अगले ही दिन से जरांगे ने जालना के अपने पैतृक अंतरवाली सराती गांव में दूसरी बार भूख हड़ताल शुरू कर दी। जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार को 40 दिन का समय दिया गया था लेकिन उसने आरक्षण के लिए कुछ नहीं किया।
मनोज जरांगे
- फोटो : सोशल मीडिया
फिर तोड़फोड़ और आगजनी
अक्तूबर 2023 के अंत में एक बार फिर मराठा समुदाय ने ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर नेताओं के आवास में तोड़फोड़ और आगजनी की भी घटनाएं हुईं। इस बीच महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें मराठा समुदाय को आरक्षण देने पर जस्टिस संदीप शिंदे समिति की अंतरिम रिपोर्ट को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया गया। बैठक में मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि पिछड़ा वर्ग आयोग मराठा समुदाय की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन करने के लिए नए आंकड़े इकट्ठा करेगा। वहीं, अक्तूबर 2023 के अंत से ही राज्य सरकार ने मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र बांटने शुरू कर दिए।
मनोज जरांगे
- फोटो : ANI
चेतावनी के बाद सीएम ने अनशन तुड़वाया
पिछले साल दिसंबर में मनोज ने सरकार को चेतावनी दी कि 20 जनवरी, 2024 तक आरक्षण दिया जाए अन्यथा वह मुंबई की ओर मार्च का नेतृत्व करेंगे। 20 जनवरी 2024 को अपना मार्च शुरू भी कर किया। 27 जनवरी को सीएम एकनाथ शिंदे ने मनोज जरांगे से मुलाकात की और दोनों के बीच मसौदा अध्यादेश को लेकर चर्चा हुई। सीएम ने मनोज को जूस पिलाकर उनका अनशन तोड़ा जो लंबे समय से सभी मराठों के लिए कुनबी प्रमाण पत्र की मांग कर रहे थे। इसी बीच, महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय के सदस्यों के रक्त सबंधियों को कुनबी की मान्यता देने के लिए एक अधिसूचना जारी की है।