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Crackers: सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह के पटाखे प्रतिबंधित किए हैं, जानें किस तरह की आतिशबाजी पर नहीं है पाबंदी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 09 Nov 2023 07:38 PM IST

सार

बेरियम युक्त पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश दोहराया है। कोर्ट ने कहा कि बेरियम युक्त पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का उसका आदेश हर राज्य पर लागू होता है। यह केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। 
 
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ईको फ्रेंडली पटाखे। - फोटो : अमर उजाला।
दिवाली आने में अब महज कुछ ही दिन बचे हैं। देशभर में इस त्योहार को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। रौशनी की इस पर्व पर लोग जश्न के लिए पटाखों को जलाते हैं और आतिशबाजी करते हैं। हालांकि, दिल्ली एनसीआर, मुंबई जैसे कई इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कुछ पटाखों को जलाने पर बंदिशें लगाई गई हैं। पटाखों को जलाने पर पाबंदी का जिक्र हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में आया है। 

ऐसे में हमें जानना चाहिए कि आखिर किस तरह के पटाखे प्रतिबंधित किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या कहता है? 
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ईको फ्रेंडली पटाखे। - फोटो : अमर उजाला।
दिवाली आने में अब महज कुछ ही दिन बचे हैं। देशभर में इस त्योहार को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। रौशनी की इस पर्व पर लोग जश्न के लिए पटाखों को जलाते हैं और आतिशबाजी करते हैं। हालांकि, दिल्ली एनसीआर, मुंबई जैसे कई इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कुछ पटाखों को जलाने पर बंदिशें लगाई गई हैं। पटाखों को जलाने पर पाबंदी का जिक्र हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में आया है। 

ऐसे में हमें जानना चाहिए कि आखिर किस तरह के पटाखे प्रतिबंधित किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या कहता है? 

पटाखे - फोटो : Pixabay
आखिर किस तरह के पटाखे प्रतिबंधित किए गए हैं?
बीते मंगलवार को बेरियम युक्त पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश दोहराया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि बेरियम युक्त पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का उसका आदेश हर राज्य पर लागू होता है। यह केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। 

शीर्ष अदालत पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली एक लंबित याचिका में दायर हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। इस आवेदन में राजस्थान सरकार को वायु और ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए कदम उठाने और दिवाली और शादियों के दौरान उदयपुर शहर में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने राजस्थान सरकार से दिवाली के दौरान पटाखे फोड़ने पर अपने पहले के निर्देशों का पालन करने को कहा। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में आम लोगों को जागरूक करना महत्वपूर्ण है। विडंबना यह है कि आजकल बच्चे ज्यादा पटाखे नहीं फोड़ते हैं, लेकिन बुजुर्ग ऐसा करते हैं। यह गलत धारणा है कि जब प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण की बात आती है तो यह केवल अदालत का कर्तव्य है। इसके लिए लोगों को आगे आना होगा। वायु और ध्वनि प्रदूषण का प्रबंधन करना हर किसी का काम है। 

अदालत ने आवेदन को लंबित रखते हुए कहा कि आवेदन में कोई विशेष आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अदालत ने वायु और ध्वनि प्रदूषकों की जांच के लिए कई आदेश पारित किए हैं। ये आदेश राजस्थान सहित हर राज्य पर लागू होते हैं। सरकार को न केवल त्योहारी सीजन बल्कि उसके बाद भी इस पर ध्यान देना चाहिए।

इस दौरान हस्तक्षेपकर्ता के वकील ने कहा कि वे केवल राज्य सरकार को यह निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि इस अदालत द्वारा पटाखे फोड़ने पर लगाया गया प्रतिबंध दिल्ली-एनसीआर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान पर भी लागू है। राजस्थान सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी ने कहा कि राज्य ने आवेदन पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। राज्य सभी अदालती आदेशों का पालन करेगा, लेकिन कार्यान्वयन समाज की सामूहिक चेतना पर निर्भर करता है।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
पटाखों पर क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश?
अक्टूबर 2018 में शीर्ष अदालत ने 'हरित पटाखों' और कम उत्सर्जन वाले (बेहतर पटाखों) को छोड़कर सभी पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसने 'जुड़े पटाखों' के निर्माण और बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया, आतिशबाजी में बेरियम लवण के उपयोग पर रोक लगा दी और कहा कि उनका शोर स्तर सीमा के भीतर होना चाहिए। कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2021 के अपने आदेश में इसे दोहराया। 
 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
पटाखों पर क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश?
अक्टूबर 2018 में शीर्ष अदालत ने 'हरित पटाखों' और कम उत्सर्जन वाले (बेहतर पटाखों) को छोड़कर सभी पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसने 'जुड़े पटाखों' के निर्माण और बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया, आतिशबाजी में बेरियम लवण के उपयोग पर रोक लगा दी और कहा कि उनका शोर स्तर सीमा के भीतर होना चाहिए। कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2021 के अपने आदेश में इसे दोहराया।

पटाखे - फोटो : अमर उजाला
ज्यादातर पटाखे खतरनाक क्यों होते हैं, इनमें ऐसा क्या होता है?
पटाखों में आम तौर पर चार प्राथमिक तत्वों से मिलकर बने होते हैं जिनमें ऑक्सीडाइजर, ईंधन, रंग भरने वाले एजेंट और बाइंडर शामिल है। पटाखे में आग पकड़ने के लिए ऑक्सीडाइजर की आवश्यकता होती है, ईंधन आग को बनाए रखता है, रंग एजेंट इसे रंग और चमक देते हैं, जबकि बाइंडर इस मिश्रण को तब तक बनाए रखता है जब तक कि पटाखा खत्म न हो जाए। बेरियम जैसे रसायन रंग भरने वाले एजेंट हैं और मानव स्वास्थ्य पर उनके हानिकारक प्रभाव डालते हैं। ऐसे ही पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

...तो किस तरह के पटाखे फोड़ सकते हैं?
कोर्ट ने अक्तूबर 2021 के अपने आदेश में हरित पटाखे फोड़ने को अनुमति दी थी। दरअसल, ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे होते हैं जिनमें हानिकारक रसायन नहीं होते हैं। खतरनाक तत्वों की बजाय ग्रीन पटाखों में ऐसे घटकों को डाला जाता है जो वातावरण के लिए कम खतरनाक और कम हानिकारक होते हैं। ये पटाखे कम हानिकारक रसायनों का उत्सर्जन करते हैं और जलवाष्प भी छोड़ते हैं, जो धूल को दबाने का काम करता है। 
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