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Cash For Query: क्या जाएगी महुआ मोइत्रा की सांसदी, लोकसभा के मामले में सीबीआई और लोकपाल की बात क्यों आई?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 09 Nov 2023 01:14 PM IST

सार

Cash For Query Case: पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले की जांच कर रही लोकसभा की आचार समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस मामले की कानूनी और संस्थागत जांच की सिफारिश भी की गई है।
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महुआ मोइत्रा - फोटो : amar ujala
तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोपों की जांच कर रही संसद की आचार समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में महुआ की सांसदी खत्म करने की सिफारिश की गई है। साथ ही मामले की कानूनी और संस्थागत जांच की सिफारिश की गई है। 

आइये जानते हैं कि पैसे लेकर सवाल पूछने का पूरा मामला क्या है? मामले में आचार समिति की रिपोर्ट क्या आई है? क्या महुआ की सदस्यता जा सकती है, नियम क्या कहते हैं? पहले भी क्या ऐसे मामले सामने आए हैं? 
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महुआ मोइत्रा - फोटो : amar ujala
तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोपों की जांच कर रही संसद की आचार समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में महुआ की सांसदी खत्म करने की सिफारिश की गई है। साथ ही मामले की कानूनी और संस्थागत जांच की सिफारिश की गई है। 

आइये जानते हैं कि पैसे लेकर सवाल पूछने का पूरा मामला क्या है? मामले में आचार समिति की रिपोर्ट क्या आई है? क्या महुआ की सदस्यता जा सकती है, नियम क्या कहते हैं? पहले भी क्या ऐसे मामले सामने आए हैं? 

Mahua Moitra - फोटो : अमर उजाला
पैसे लेकर सवाल पूछने का पूरा मामला क्या है? 
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कहने पर संसद में सवाल पूछने का आरोप है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को 15 अक्तूबर को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि महुआ द्वारा लोकसभा में हाल के दिनों तक पूछे गए 61 प्रश्नों में से 50 प्रश्न अदाणी समूह पर केंद्रित थे।



आरोप है कि कारोबारी दर्शन हीरानंदानी की ओर से अदाणी समूह पर निशाना साधने के लिए लोकसभा में सवाल पूछती थीं। उन्होंने दावा किया कि हीरानंदानी अलग-अलग स्थानों से एवं अधिकतर दुबई से सवाल पूछने के लिए मोइत्रा की ‘लॉगइन आईडी’ का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने आचार समिति के पास भेज दिया था।

 

Mahua Moitra - फोटो : Social Media
मामले में आचार समिति की रिपोर्ट क्या आई है?
पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले की जांच कर रही लोकसभा की आचार समिति ने 2 नवंबर को पूछताछ के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 500 पेज की इस रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने जो किया, वह बेहद आपत्तिजनक, अनैतिक और अपराध है। कमेटी की रिपोर्ट में टीएमसी सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही मामले की कानूनी और संस्थागत जांच की सिफारिश भी की गई है। 

इस बीच, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि लोकपाल ने महुआ के खिलाफ लगे आरोपों की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। 

nishikant dubey mahua moitra - फोटो : ANI
क्या महुआ की सदस्यता जा सकती है, नियम क्या कहते हैं? 
फिलहाल रिपोर्ट है कि आचार समिति की गुरुवार शाम को एक बैठक होगी, जहां रिपोर्ट पर मतदान कराया जाएगा। मतदान के बाद रिपोर्ट को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया जाएगा। इस मामले पर कार्रवाई करना लोकसभा अध्यक्ष पर ही निर्भर है जो तय करेंगे कि मोइत्रा को निष्कासित किया जाना चाहिए या नहीं।

आचार समिति के पिछले निर्णयों से पता चलता है कि पैनल अनैतिक आचरण के दोषी पाए गए सदस्य के खिलाफ सदन से निलंबन, माफी या निंदा जैसे कदमों की सिफारिश करता है। हालांकि, इसके पास सांसद पर मुकदमा चलाने की दंडात्मक शक्तियां नहीं हैं।

यदि मानें कि लोकसभा अध्यक्ष संसदीय समिति की सिफारिशों को आगे बढ़ाते हैं और मोइत्रा को निष्कासित करते हैं तो इस बात की अधिक संभावना है कि मोइत्रा इस मामले को अदालत में उठायेंगी।

CBI - फोटो : Amar Ujala
तो क्या महुआ के खिलाफ सीबीआई जांच होगी? 
लोकसभा पैनल की जांच के अलावा मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल के पास दर्ज शिकायत लंबित है। भ्रष्टाचार निरोधक संस्था राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखने के लिए जिम्मेदार है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य पिछले उदाहरणों का हवाला देते एक बयान में कहा कि मोइत्रा के मामले में यदि शिकायत उनके द्वारा गैर-कानूनी रूप से उपहार स्वीकार करने के बारे में है, तो मामला विशेषाधिकार के उल्लंघन का बन जाता है और इसे अचार समिति द्वारा नहीं निपटाया जा सकता है। चूंकि किसी लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना एक आपराधिक कृत्य है, इसलिए इसकी जांच आम तौर पर सरकार की आपराधिक जांच एजेंसियों द्वारा की जाती है। 

संसद भवन - फोटो : पीटीआई
पहले भी पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले आए? 
इससे पहले साल 2005 में 11 सांसदों पर संसद में सवाल उठाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद दो पत्रकारों द्वारा इन सांसदों के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया और एक समाचार चैनल पर प्रसारित किया गया जिसे कैश-फॉर-क्वेश्चन घोटाले के रूप में जाना गया। बाद में सभी 11 सांसदों की सदस्यता खत्म कर दी गई। निलंबित सांसदों ने निष्कासन को चुनौती दी, लेकिन 2007 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा।
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