सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' के जवान बंदूक की गोली से पाकिस्तानी रेंजर्स को कठोर जवाब देते रहे हैं। प्राकृतिक बाधाएं आती हैं, लेकिन बीएसएफ अपनी ड्यूटी पर अडिग रहती है। खासतौर से, जम्मू और पंजाब से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'पछुआ पवन और सरकंडे' की कहानी लंबे समय से चल रही है। हालांकि पछुआ पवन और सरकंडे, ये दोनों ही 'सीमा सुरक्षा बल' के लिए मुसीबत बन जाते हैं। जब यह हवा चलती है तो पाकिस्तानी रेंजर्स ना-पाक हरकत करने लगते हैं। बीएसएफ के पूर्व डीजी संजीव कृष्ण सूद ने अपनी किताब 'बीएसएफ'- 'द आइज एंड ईयर्स ऑफ इंडिया' में लिखा है, जब पछुआ पवन चलती है तो पाकिस्तानी वहां पर आग जला देते हैं। चूंकि वह हवा पश्चिम दिशा से पूरब की तरफ चलती है, इसलिए वह चंद मिनटों में भारतीय सीमा की ओर बढ़ने लगती है।
बीएसएफ के जवान बाल्टी लेकर आग बुझाने के लिए दौड़ते हैं। सरकंडे, जिन्हें 'वाइल्ड एलीफेंट ग्रास' कहा जाता है, उसकी आड़ में पड़ोसी की तरफ से घुसपैठिये, स्मगलर और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने वाली आईएसआई समर्थित बॉर्डर एक्शन टीम 'बैट' हरकत करती है। इसके लिए बीएसएफ जवान दरांती की मदद से सरकंडे काटते हैं। एसके सूद कहते हैं कि अगर स्थानीय प्रशासन से बीएसएफ को फंड मिल जाए तो वे उपकरण खरीदकर सरकंडे काट सकते हैं। पानी के टैंकर द्वारा प्रभावी तरीके से आग पर काबू पा सकते हैं।