पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (डब्ल्यूबीसीएचएसई) की अध्यक्ष महुआ दास 12वीं कक्षा के नतीजों की घोषणा के दौरान टॉपर की धार्मिक पहचान को उजागर करने को लेकर विवादों में आ गईं।
राजनीतिक नेताओं ने दावा किया कि टीएमसी की तुष्टिकरण की नीति को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है। हालांकि, परिषद के वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया, दास सिर्फ इस तथ्य को रेखांकित करना चाहती थीं कि अल्पसंख्यक समुदाय की एक लड़की ने सामाजिक और आर्थिक बाधाओं से संघर्ष करते हुए परीक्षा में टॉप किया।
इस पर बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ममता बनर्जी के बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति उस समय निचले स्तर पर पहुंच गई, जब बोर्ड की अधिकारी ने कक्षा 12वीं की छात्रा की शैक्षणिक उपलब्धि को उसकी धार्मिक पहचान से कम कर दिया। उन्होंने बार-बार बताया कि वह लड़की मुस्लिम है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पश्चिम बंगाल बोर्ड कक्षा 12वीं के परिणाम गुरुवार, 22 जुलाई, 2021 को घोषित किए गए थे। कुल 8,19,202 छात्र शाम 04 बजे के बाद अपने व्यक्तिगत स्कोर कार्ड प्राप्त किया। पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (डब्ल्यूबीसीएचएसई) के अध्यक्ष महुआ दास ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों के परिणाम की घोषणा की थी।
पश्चिम बंगाल बोर्ड के अध्यक्ष बोर्ड महुआ दास ने बताया था कि कुल 86 छात्रों ने शीर्ष 10 स्थानों पर कब्जा किया है। कुल छात्रों में से 60 फीसदी से अधिक ने कक्षा 12वीं की परीक्षा में 60 फीसदी और उससे अधिक अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में जगह बनाई।
गौरतलब है कि इस साल राज्य में कोविड-19 मामलों में वृद्धि के कारण परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकीं थीं। बोर्ड ने वैकल्पिक मूल्यांकन नीति का पालन करते हुए कक्षा 12वीं के छात्रों का परिणाम तैयार किया गया था।
महुआ दास ने कहा था हालांकि, इस बार पश्चिम बंगाल बोर्ड ने कोई मेरिट सूची जारी नहीं की गई। लेकिन मुर्शिदाबाद जिले की एक छात्रा ने सबसे ज्यादा अंक हासिल किए हैं, स्टेट टॉपर ने टॉपर ने 500 में से 499 अंक प्राप्त किए हैं।