भाजपा ने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक, 2023 का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि नई खोज समिति कुलपतियों की नियुक्ति पर सत्तारूढ़ पार्टी के नियंत्रण को और बढ़ाएगी। नए विधेयक के मुताबिक, पांच सदस्यीय खोज समिति में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), राज्य शिक्षा विभाग और राज्य उच्च शिक्षा परिषद के एक-एक प्रतिनिधि होंगे। राज्य सरकार इस साल मई में इस संबंध में एक अध्यादेश लाई थी।
शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा, 'हम पहले एक अध्यादेश लाए थे और आज हमने इसके संबंध में एक विधेयक पारित किया है। विधेयक का मुख्य सार यह है कि कुलपतियों की खोज समिति के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच कर दी गई है। उन्होंने, यह यूजीसी के निर्देशों के अनुसार है। अध्यादेश के लागू होने से पहले खोज समितियों में संबंधित विश्वविद्यालय, कुलाधिपति और उच्च शिक्षा विभाग के नामित सदस्य शामिल थे।
विधेयक पर आपत्ति जताते हुए भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा, 'यह विधेयक यह सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है कि शिक्षा प्रणाली का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो। नए नियम के तहत तीन सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा नामित मुख्यमंत्री, राज्य शिक्षा विभाग और राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा की जाएगी। इसलिए हम इस विधेयक के मुख्य उद्देश्य को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।'
भाजपा विधायक दल ने बाद में राज्यपाल सी वी आनंद बोस से मुलाकात की और उनसे विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया।
राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और राजभवन के बीच विवाद चल रहा था। राज्यपाल सी वी आनंद बोस के 11 विश्वविद्यालयों में अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति के फैसले की राज्य सरकार ने कड़ी आलोचना की थी।