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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से मनीष सिसोदिया-राणा कपूर को झटका; भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को बड़ी राहत

Fri, 04 Aug 2023 08:21 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर बेंच के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने अंडमान-निकोबार के मुख्य सचिव केशव चंद्रा को निलंबित करने और एलजी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शराब नीति अनियमितता मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने सिसौदिया की जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय को और समय दिया है।

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इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। इस बीच राणा कपूर ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस मामले ने पूरी वित्तीय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। 

वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर बेंच के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने अंडमान-निकोबार के मुख्य सचिव केशव चंद्रा को निलंबित करने और एलजी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।

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Supreme Court - फोटो : ANI
अरुण गोयल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एनजीओ 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' की जनहित याचिका खारिज कर दी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संविधान पीठ इस मुद्दे पर पहले ही गौर कर चुकी है।

सुवेंदु अधिकारी - फोटो : twitter.com/SuvenduWB
सुप्रीम कोर्ट से सुवेंदु अधिकारी को राहत
उच्चतम न्यायालय ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ अपराध को अंजाम देने के आरोप पर प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले से संबंधित याचिका पर नए सिरे से सुनवाई करने को कहा है। दरअसल, कोर्ट ने आदेश दिया था कि पुलिस अब से किसी भी वैध मामले में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती है। कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस के पास सही जानकारी है तो FIR दर्ज की जा सकती है। पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है।

सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चार सितंबर को
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े उन दो मामलों में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चार सितंबर को करेगा। मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं। 

जस्टिस संजीव खन्ना तथा न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने सिसोदिया की पत्नी के चिकित्सकीय दस्तावेजों को देखा और कहा कि उनकी हालत काफी हद तक स्थिर है, इसलिए पीठ पूर्व उप मुख्यमंत्री की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर नियमित जमानत याचिकाओं के साथ ही गौर करेगी। 

मनीष सिसोदिया ने अपनी पत्नी की खराब सेहत के आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित दो मामलों में सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सीबीआई और ईडी से जवाब दाखिल करने को कहा था।

अंडमान के मुख्य सचिव को निलंबित करने, उपराज्यपाल पर जुर्माने के फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिकों तक लाभ पहुंचाने के पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव केशव चंद्रा को निलंबित करने और उपराज्यपाल पर जुर्माना लगाने संबंधी कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी के आवेदनों पर गौर किया और हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर पीठ के आदेश पर रोक लगा दी। पीठ ने कहा कि हम इन आदेशों पर रोक लगाते हैं। हम मामले में अगले शुक्रवार को सुनवाई करेंगे।

इससे पहले श्रमिकों को लाभ जारी करने के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर पीठ के पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव केशव चंद्रा को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया था, जबकि उपराज्यपाल डीके जोशी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जो उन्हें अपने कोष से वहन करना था। पिछले साल 19 दिसंबर को पारित आदेश में अंडमान प्रशासन द्वारा नियोजित लगभग 4,000 दैनिक मजदूरों (डीआरएम) को उच्च वेतन और डीए (महंगाई भत्ता) प्रदान करने की बात कही गई थी।

आपत्तिजनक वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कोई फर्क नहीं पड़ता
एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सर्वोच्च अदालत का अपमान किया गया है। इस पर न्यायालय ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक वकील ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के सामने इसका उल्लेख किया।

वकील ने कहा कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। मैंने रजिस्ट्रार को पहले ही इस बारे में सूचित कर दिया है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि चिंता नहीं करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वकील ने यह भी कहा कि मणिपुर हिंसा मामले में सुनवाई के बाद वीडियो में सर्वोच्च अदालत के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है। इस बारे में चिंता नही करें।

हिंदी राष्ट्रभाषा है, सुप्रीम कोर्ट का यूपी से बंगाल केस ट्रांसफर करने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है और उत्तर प्रदेश में ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश किए जाने वाले गवाहों से हिंदी में गवाही देने की उम्मीद की जाती है, भले ही वे एक अलग राज्य से हों। इसके बाद न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने आरोपी की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि चूंकि दुर्घटना पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में हुई थी, इसलिए दावा याचिका पर फैसला करना दार्जिलिंग में एमएसीटी के लिए समीचीन होगा।

याचिकाकर्ता, जो दुर्घटना वाले वाहन का मालिक था उसने यह तर्क देते हुए अदालत का रुख किया कि चूंकि मामले के सभी गवाह सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल में) से हैं, इसलिए संभावना हो सकती है कि यदि कार्यवाही की जाती है तो भाषा एक बाधा के रूप में कार्य कर सकती है।

याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज करते हुए, न्यायालय ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, इसमें कोई संदेह नहीं है कि लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं. यहां कम से कम 22 (बाईस) आधिकारिक भाषाएं हैं. हालांकि, हिंदी राष्ट्रीय भाषा है, इसलिए पश्चिम बंगाल के गवाहों से यूपी कोर्ट में हिंदी में गवाही की उम्मीद है।
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सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी नेता कुंतल घोष से जुड़े कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया
पश्चिम बंगाल में कथित शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपी टीएमसी युवा विंग के नेता कुंतल घोष को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

इस बीच, मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि घोष मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के समक्ष "हिरासत में यातना" की अपनी याचिका उठा सकते हैं। घोष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि मामले की योग्यता के आधार पर उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियां और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाना अनुचित था। पीठ ने कहा कि 25 लाख रुपये की लागत के भुगतान का आदेश रद्द कर दिया जाएगा।
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