'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार की खबर के मुताबिक, इमरान खान ने अदालत में जो बयान सौंपा है, उसमें उनके हवाले से कहा गया है कि उनकी योजना पूर्व सेना प्रमुख (सेवानिवृत्त) जनरल कमर जावेद बाजवा को यह संदेश देने की थी कि अगर सरकार के खिलाफ साजिश रची गई तो पूरी योजना का पर्दाफाश होगा।
क्रिकेटर से नेता बने इमरान ने यह भी कहा कि गोपनीय राजनयिक केबल की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं थी। उन्होंने कहा, बाजवा के निर्देशों पर एक ने उनके यहां से गोपनीय केबल को चुरा लिया था। असली गोपनीय दस्तावेज कभी उनके पास नहीं था।
उन्होंने कहा, मेरे साढ़े तीन साल के कार्यकाल के दौरान पीएमओ की सुरक्षा की जिम्मेदारी सैन्य सचिव, मुख्य सचिव और सचिव (प्रोटोकॉल) की थी। खबर में बताया गया कि सुनवाई के दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक ने विशेष अदालत में बयान दिया। जिसमें कहा गया कि उन्होंने रैली में केवल एक कागज लहराया था, ताकि वह किसी देश का नाम लिए बिना साजिश के बारे में बता सकें।
गोपनीय सरकारी दस्तावेज का मामला पहली बार 27 मार्च 2022 को सामने आया था। जब इमरान खान ने एक सार्वजनिक जनसभा में एक पत्र लहराया था। जिसके साथ ही उन्होंने दावा किया था कि यह उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का सबूत है।
इमरान खान ने पत्र में लिखी सामग्री का खुलासा नहीं किया और न ही किसी देश के नाम का जिक्र किया था। लेकिन, कुछ दिनों बाद ही उन्होंने अमेरिका पर साजिश रचने का आरोप लगाया था और कहा था कि दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने उन्हें हटाने की मांग की थी।