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IAF: भविष्य में कैसे लड़े जाएंगे युद्ध? एयर चीफ मार्शल ने दिया जवाब, कहा- यह इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत

Wed, 27 Mar 2024 11:28 AM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भविष्य के युद्ध अलग तरीके से लड़े जाएंगे। उन्होंने अंतरिक्ष के सैन्यीकरण को सबसे बड़ी जरूरत बताया है। 

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भारतयी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी (फाइल) - फोटो : social media
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विस्तार
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भारत को भविष्य के लिए अभी से तैयार रहने की जरूरत है और हमें यह स्वीकार करने की जरूरत है कि भविष्य में अलग तरीके से युद्ध लड़े जाएंगे। यह बातें वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने दिल्ली में बताई हैं। 

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‘भविष्य के युद्ध और भी ज्यादा घातक होंगे’
दरअसल वायुसेना प्रमुख दिल्ली में एयरोस्पेस पावर को लेकर आयोजित किए गए सम्मेलन में शामिल होने आए थे। यहां उनसे भविष्य में होने वाले युद्धों और उनमें इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक को लेकर सवाल पूछे गए। इसके जवाब में एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने कहा कि हमें यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि भविष्य के युद्ध अलग तरीके से लड़े जाएंगे। भविष्य में होने वाले युद्धों में क्या अलग देखने को मिलेगा? इसके जवाब में वी आर चौधरी ने कहा कि भविष्य के युद्धों में गतिज (kinetic ) और गैर गतिज (non-kinetic) बलों का मिश्रण देखने को मिलेगा। इस वजह से युद्ध और भी ज्यादा घातक हो जाएंगे।

‘अंतरिक्ष का सैन्यीकरण आज की सबसे बड़ी जरूरत’
एयर चीफ मार्शल ने आसमान और अंतरिक्ष को भविष्य के युद्धों का केंद्र बिंदु करार दिया है। उनके मुताबिक आसमान को आश्चर्य और अन्वेषण का क्षेत्र माना गया है, जिसकी सीमाएं विशाल नीले विस्तार में विलीन हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया के कई देश अंतरिक्ष आधारित संपत्तियों पर भरोसा कर रहे हैं, उससे लगता है कि अंतरिक्ष का सैन्यीकरण और हथियारीकरण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
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ये होंगी भविष्य के युद्धों की विशेषताएं 
एयर चीफ मार्शल ने भविष्य के युद्धों की विशेषताएं भी बताई। उनके मुताबिक भविष्य के युद्धों में गतिज और गैर गतिज बलों का एक साथ प्रयोग होगा। इसके अलावा बहुत सारे डोमेन में युद्धों का संचालन होते देखा जा सकता है। इस वजह से ये संघर्ष और भी ज्यादा घातक हो जाएंगे।

बालाकोट स्ट्राइक का दिया उदाहरण
इस दौरान एयर चीफ मार्शल ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से पता चला है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो एयरोस्पेस शक्ति को दुश्मन की सीमा तक प्रभावी ढंग से ले जाया जा सकता है। वायुसेना प्रमुख के अनुसार अंतरिक्ष भी सैन्य अभियानों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है। 

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