संगीत समारोह आयोजित करने के लिए गांव के ऊंची जाति के लोगों से अनुमति न लेना तमिलनाडु के तीन दलित बुजुर्गों के लिए भारी पड़ गया। मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना में तीन बुजुर्गों को पैरों पर गिरकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया।
जानकारी के अनुसार इन बुजुर्गों ने घर में अपने समाज के लोगों के बीच एक संगीत समारोह का आयोजन करवाया था और इसके लिए ऊंची जाति के लोगों से मंजूरी नहीं ली थी। इसी के चलते ग्राम पंचायत ने उन्हें यह सजा दी। हालांकि, पंचायत का कहना है कि उन्होंने कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया था, इसलिए ऐसा किया गया।
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राज्य के थिरुवेन्नलूर के पास ओड्डानंडल में दलित थिरुमल, संथानम और अरुनमुगल ने गांव के देवता की पूजा के लिए एक संगीत समारोह किया था। इसमें समाज के कई लोग शामिल हुए थे। जानकारी पाकर पुलिस वहां पहुंची और कोरोना नियम तोड़ने के चलते तीनों को थाने ले आई। जहां से माफीनामा लिखवाकर उन्हें छोड़ दिया गया।
लेकिन, इसके बाद 14 मई को इन तीनों की गांव की पंचायत के सामने पेशी हुई। यहां तीनों को पैरों पर गिरकर माफी मांगने की सजा सुनाई गई। जानकारी के अनुसार इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है और यह तानाशाही फरमान सुनाने वाली पंचायत के आठ सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।