कलकत्ता हाईकोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को अजीबोगरीब मामला सामने आया। हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मृत व्यक्ति के परिजनों ने कोर्ट से अपील की है कि वो यमराज को आदेश दें कि वह दोषियों को सजा भुगतने के लिए यमलोक से वापस जिंदा इस धरती पर भेजें।
याचिकाकर्ता ने अपील की है कि अगर यमराज ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चलाया जाए। दरअसल, यह मामला 1984 का है। गरुलिया के रहने वाले समर चौधरी और उनके दो बेटों ईश्वर और प्रदीप का दूसरे पक्ष के साथ किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था।
दोनों पक्षों में मारपीट हुई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर अलीपुर के एडिशनल सेशन जज ने तीनों आरोपियों को नौ फरवरी 1987 को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। उसी साल मार्च में दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर दोनों की सजा पर रोक लगा दी।
मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही तीन में से दो आरोपी समर और प्रदीप की मौत हो गई। वहीं, 22 जून, 2006 में आरोपित पक्ष के वकील की पद्दोन्नति हो गई और वो जज बन गए। इन परिस्थितियों में बिना वकील के पीड़ित परिवार कोर्ट को दोनों आरोपियों की मौत के बारे में नहीं बता पाया।
बाद में अदालत से माफी मांगते हुए पीड़ित परिवार ने आवेदन में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय यमराज को निर्देश दें कि वह दोनों आरोपियों को पृथ्वी पर वापस भेजें ताकि वे कोर्ट द्वारा दी गई सजा पूरी करें।