देश की शान तिरंगा आखिरकार श्रीनगर के लाल चौक से लेकर गोवा के साओ जैसिंटो द्वीप और पूरे देश में फहरा रहा है। नौसेना ने शुक्रवार को गोवा के इस द्वीप पर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया था। इस पर गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने द्वीपवासियों को चेतावनी दी थी। इसके बाद शनिवार को नौसेना ने कार्यक्रम आयोजित कर तिरंगा फहराया।
दरअसल, रक्षा मंत्रालय आजादी के 75 वें साल के मौके पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम के तहत देश भर के द्वीपों पर तिरंगा फहरा रहा है। 13 से 15 अगस्त तक ये कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शुक्रवार को नौसेना ने अचानक साओ जैसिंटो द्वीप पर अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया। इसकी वजह स्थानीय लोगों द्वारा कार्यक्रम का विरोध करना बताया गया। इसे लेकर नागरिकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
मुख्यमंत्री सावंत ने दी यह चेतावनी
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने द्वीपवासियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि यहां पर किसी भी कीमत पर झंडा फहराया जाएगा। भारत विरोधी गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा। शनिवार को कार्यक्रम होने के बाद सावंत ने इस पर खुशी जताई। समारोह की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘सेंट जैसिंटो द्वीप पर स्थानीय लोगों को भारतीय ध्वज फहराने में नौसेना के साथ शामिल होते हुए देखकर खुशी हो रही है। मुझे खुशी है, सद्बुद्धि आई। जयहिंद, देश पहले।’
नौसेना ने कहा- थोड़ी गलतफहमी हो गई थी
नौसेना के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि 13 अगस्त को थोड़ी सी गलतफहमी के बाद, गोवा नौसेना क्षेत्र की एक टीम और निवासियों ने सेंट जैसिंटो द्वीप पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सौहार्दपूर्ण ढंग से भाग लिया। दोपहर करीब 2.45 बजे झंडा फहराया गया। द्वीपवासियों ने कार्यक्रम के दौरान नौसेना टीम के साथ राष्ट्रगान गाया।
लोगों को था यह डर, इसलिए किया विरोध
नौसेना द्वारा कार्यक्रम निरस्त करने के बाद साओ जैसिंटो के निवासियों ने सफाई दी थी कि उन्होंने झंडा फहराने का विरोध नहीं किया था। उन्हें डर है कि नौसेना का कार्यक्रम इस द्वीप को केंद्र सरकार की तरफ से अपने अधिकार में लेने की शुरुआत हो सकती है। बंदरगाह प्राधिकरण अधिनियम, 2020 के तहत केंद्र सरकार ऐसा कर सकती है।
साओ जैसिंटो द्वीप पर रहते हैं 100 परिवार
गोवा का साओ जैसिंटो द्वीप आईएनएस हंसा बेस से लगभग चार किलोमीटर दूर दक्षिण में है। द्वीप पर करीब 100 परिवार रहते हैं। कुछ स्थानीय निवासियों ने पहले कहा था कि वे चिंतित हैं कि मुरगांव पत्तन न्यास भविष्य में इस द्वीप को नियंत्रण में ले सकता है।