'आपको शर्मिंदा नहीं करना चाहता...'
उपराष्ट्रपति ने 22 दिसंबर को खरगे द्वारा भेजे पत्र का जवाब देते हुए कहा कि सदन में अव्यवस्था जानबूझकर और एक रणनीति का हिस्सा थी। धनखड़ ने खरगे को भेजे निमंत्रण में लिखा, मैं इस संचार में मुख्य विपक्षी दल की पूर्व निर्धारित भूमिका का संकेत देकर आपको शर्मिंदा नहीं करना चाहता, लेकिन जब हम आमने सामने बैठकर बात करेंगे तो मैं आपके साथ इसे साझा करूंगा। जरूरी है कि हम इस सब से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर या जब भी आपको उपयुक्त लगे आप मेरे आवास पर आएं और हम इस मसले पर बातचीत करेंगे।
धनखड़ ने खरगे के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस नेता का यह दावा कि ‘हम दृढ़ता से बातचीत और चर्चा को बढ़ावा देने में विश्वास करते हैं’ सदन के कार्यों में भी प्रतिबिंबित हो। धनखड़ ने आगे लिखा, पूरे सत्र के दौरान, सदन में और लिखित संचार के माध्यम से बातचीत के लिए आपकी कृपा सुनिश्चित करने के मेरे बार-बार अनुरोध के बावजूद, वह फलीभूत नहीं हुआ।
'जानबूझकर पैदा की गई अव्यवस्था'
सभापति ने कहा कि निलंबन का आधार, खरगे के रुख के विपरीत, सदन में नारेबाजी, तख्तियां लहराना, सदन के वेल में प्रवेश करना और सभापति की ओर इशारा करके जानबूझकर अव्यवस्था पैदा करना था। अप्रिय कदम उठाने से पहले सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेरी ओर से सभी प्रयास खत्म हो चुके थे।
खरगे ने दिया था धनखड़ के पत्र का जवाब
इससे पहले खरगे ने शुक्रवार को धनखड़ को पत्र लिखकर कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का निलंबन भारत के संसदीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए हानिकारक है। धनखड़ को लिखे अपने पत्र में खरगे ने कहा था कि वह इतने सारे सांसदों के निलंबन से दुखी हैं और हताश एवं निराश महसूस कर रहे हैं।
46 सांसदों को राज्यसभा से किया गया था निलंबित
कांग्रेस अध्यक्ष धनखड़ के पिछले पत्र का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि आसन से ऐसी मांग करके सदन को निष्क्रिय करना जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है, दुर्भाग्यपूर्ण और जनहित के खिलाफ है। संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने से एक दिन पहले गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। शीतकालीन सत्र के दौरान 46 सांसदों को अमर्यादित व्यवहार और कदाचार के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था। संसद का शीतकालीन सत्र चार दिसंबर को शुरू हुआ था और इसे 22 दिसंबर तक चलना था।