अजय पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं और पिछड़ी कही जाने वाली कानू जाति से ताल्लुक रखते हैं। वह कांग्रेस के पूर्वी यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेहद करीबी माने जाते हैं और उनके साथ उत्तर प्रदेश के हर दौरे में नजर आते हैं।
वह सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मुखर भी हैं और यूपी में हर मसले को उठाने को लेकर तत्पर रहते हैं। ऐसे में कांग्रेस को अजय से काफी उम्मीदे हैं।
अजय कुमार लल्लु एक स्थानीय कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। वह शुरू से जमीनी आंदोलनों में बेहद सक्रिय दिखते रहे हैं। कई बार उनपर पुलिस की लाठियां भी बरसीं। लोग उन्हें 'धरना कुमार' भी कहा करते हैं।
विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले अजय को पहली बार हार नसीब हुई। चुनाव हारने के बाद आजीविका चलाने के लिए अजय मजदूरी करने दिल्ली पहुंचे और दिहाड़ी पर काम किया। इन दिनों में मजदूरी के दौरान भी क्षेत्र की जनता से संपर्क में रहे।
वह फिर से कुशीनगर लौटे और सड़कों पर संघर्ष करने लगे। साल 2012 में जब विधानसभा चुनाव हुआ तो उन्होंने भाजपा के नंद किशोर मिश्रा को 5860 वोटों से हरा दिया और पहली बार विधायक बने। 2017 में वह दूसरी बार विधायक बने।