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Kashi-Vishwanath Corridor: क्या पूर्वांचल का रास्ता भाजपा के लिए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से होकर जाता है, भोजपुरी से पीएम ने क्या दिया संदेश

प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 13 Dec 2021 04:26 PM IST

सार

2022 के चुनावों पर नजर रखते हुए, भाजपा की योजना एक महीने में वाराणसी में 30 कार्यक्रम आयोजित करने की है। इसकी तैयारी के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक समन्वय समिति का गठन किया है, जो 13 दिसंबर से 14 जनवरी  2022 तक कई कार्यक्रमों का आयोजन करेगी।
 
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पीएम मोदी ने गंगा आरती में शिरकत की। - फोटो : ANI
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया है। पांच अगस्त 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करने और इस साल नवंबर में केदारनाथ मंदिर में आदि शंकराचार्य की 12 फुट की प्रतिमा का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी के 700 करोड़ रुपये की काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने से भारतीय जनता पार्टी को यूपी चुनाव में बड़ा सियासी फायदा मिलने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि खासतौर पर पूर्वांचल में भाजपा को अपना जनाधार मजबूत रखने में सहायता मिलेगी। चुनावी साल को देखते हुए भाजपा ने इस कार्यक्रम का आयोजन भी बहुत भव्य किया और इसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी शिरकत की। 

चुनाव में हिंदुत्व+विकास का एजेंडा   
पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह तीसरी बार होगा जब पीएम मोदी ने प्राचीन हिंदू मंदिरों से संबंधित प्रमुख विकास या निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद मोदी सरकार ने उन हिंदुओं के धार्मिक स्थलों का विकास किया है जिनकी पहले उपेक्षा की जा रही थी। भाजपा अयोध्या और काशी विश्वनाथ मंदिर के विकास के रूप में भी अपना दावा पूरा करती नजर आ रही है।




माना जा रहा है कि इसका फायदा भाजपा को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में तो मिलेगा ही प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र होने के कारण लोकसभा चुनाव में भी इसका फायदा मिल सकता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में केवल मंदिरों का ही विकास नहीं हुआ है बल्कि पूरे बनारस की गलियों, चौराहों, सड़कों और फ्लाईओवरों का भी विकास किया गया है। भाजपा गुजरात मॉडल की तरह काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना को मतदाताओं के सामने आध्यात्मिक और विकास मॉडल के रूप में पेश करेगी।
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पीएम मोदी ने गंगा आरती में शिरकत की। - फोटो : ANI
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया है। पांच अगस्त 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करने और इस साल नवंबर में केदारनाथ मंदिर में आदि शंकराचार्य की 12 फुट की प्रतिमा का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी के 700 करोड़ रुपये की काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने से भारतीय जनता पार्टी को यूपी चुनाव में बड़ा सियासी फायदा मिलने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि खासतौर पर पूर्वांचल में भाजपा को अपना जनाधार मजबूत रखने में सहायता मिलेगी। चुनावी साल को देखते हुए भाजपा ने इस कार्यक्रम का आयोजन भी बहुत भव्य किया और इसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी शिरकत की। 

चुनाव में हिंदुत्व+विकास का एजेंडा   
पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह तीसरी बार होगा जब पीएम मोदी ने प्राचीन हिंदू मंदिरों से संबंधित प्रमुख विकास या निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद मोदी सरकार ने उन हिंदुओं के धार्मिक स्थलों का विकास किया है जिनकी पहले उपेक्षा की जा रही थी। भाजपा अयोध्या और काशी विश्वनाथ मंदिर के विकास के रूप में भी अपना दावा पूरा करती नजर आ रही है।



माना जा रहा है कि इसका फायदा भाजपा को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में तो मिलेगा ही प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र होने के कारण लोकसभा चुनाव में भी इसका फायदा मिल सकता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में केवल मंदिरों का ही विकास नहीं हुआ है बल्कि पूरे बनारस की गलियों, चौराहों, सड़कों और फ्लाईओवरों का भी विकास किया गया है। भाजपा गुजरात मॉडल की तरह काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना को मतदाताओं के सामने आध्यात्मिक और विकास मॉडल के रूप में पेश करेगी।

धाम में संबोधति करते पीएम मोदी। - फोटो : twitter @BJP
देश भर में जाएगा संदेश
काशी विश्वनाथ मंदिर धार्मिक पर्यटन का प्रमुख वैश्विक केंद्र है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने से करीब 70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को लाभ होगा। मंदिर में औसतन, 10,000 से अधिक भक्त, जिनमें से ज्यादातर वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के होते हैं, प्रतिदिन यहां आते हैं। सोमवार को, 40,000 से 50,000 से अधिक लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। श्रावण (जुलाई-अगस्त) के पवित्र महीने के दौरान सोमवार को यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में विकास कार्य देखकर केंद्र की मोदी सरकार के विकास कार्यक्रमों की चर्चा देश भर में होगी जिसका लाभ भाजपा को दूसरे राज्यों में भी मिल सकता है। 

पूर्वांचल पर पूरा जोर
जानकार कहते हैं कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन का  पूर्वांचल पर बड़ा सियासी असर पर पड़ सकता है। सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएडीएस) में प्रोफेसर और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय कुमार के मुताबिक किसान आंदोलन के कारण भाजपा को पश्चिमी यूपी में जो नुकसान होने की आशंका रही है, भाजपा इसकी भरपाई पूर्वांचल से करने की कोशिश में लगी है।

वाराणसी में पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला
बनारस पूर्वांचल की सियासत का अहम केंद्र माना जाता है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनावी अभियान का केंद्र अयोध्या के बाद काशी भी बनेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने यूपी चुनाव की कमान संभाल ली है और पूरा फोकस पूर्वांचल पर केंद्रित कर दिया है। मोदी का वाराणसी से सांसद होना और गोरखपुर से सीएम योगी का होना भाजपा के लिए एक बड़ा फैक्टर है। यूपी की 33 फीसदी सीटें इसी इलाके की हैं। यूपी के 28 जिले पूर्वांचल में आते हैं,जिनमें कुल 164 विधानसभा सीटें हैं।  2017 के चुनाव में पूर्वांचल की 164 में से भाजपा ने 115 सीटें जीती थीं। जबकि सपा को 17, बसपा को 14, कांग्रेस को दो और अन्य को 16 सीटें मिली थी।

भोजपुरी भाषी लोगों के बीच पैठ जमाने की कवायद
हालांकि कहा यह भी जाता है कि पिछले तीन दशक से पूर्वांचल का मदताता किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा है। यही वजह है कि भाजपा अपने इस गढ़ को मजबूत करने में लगी है। पूर्वांचल वोटरों को लुभाने के लिए पीएम मोदी ने सोमवार को भोजपुरी में भी लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी भोजपुरी भाषी वोटरों का खास ध्यान रख रहे हैं इसलिए जब कभी भी पूर्वांचल में कोई रैली या बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं तो वे भोजपुरी में ही लोगों का अभिवादन करते रहे हैं।

बीते सात दिसंबर को गोरखपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 हजार करोड़ की लागत से खाद कारखाना, एम्स और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) का लोकार्पण किया। उन्होंने जनता का भोजपुरी में अभिनंदन किया। पूर्वांचल के करीब 10 जिलों में बड़ी संख्या में भोजपुरी भाषी लोग हैं। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भोजपुरी भाषी लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के मकसद से ही यूपी चुनाव से ठीक पहले गोरखपुर दूरदर्शन केंद्र से भोजपुरी कार्यक्रमों की शुरूआत की गई है।
 
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