उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी पूरी ताकत के साथ कूद चुकी हैं। इसके संदर्भ में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों, गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शिलान्यास-उद्घाटन कार्यक्रमों की खूब चर्चा हो रही है। यूपी में कांग्रेस की वापसी के लिए जुटीं प्रियंका गांधी का संघर्ष और सपा की चुनावी तैयारी भी मीडिया की प्रमुखता में हैं। बहुजन समाज में ठोस जनाधार रखने वाली बसपा को इस चुनाव में ‘कमजोर खिलाड़ी’ के तौर पर आंका जा रहा है। लेकिन चुनावी पंडितों के इस आकलन से दूर बसपा बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इसके लिए बहुजन समाज पार्टी सोशल मीडिया को अपना हथियार बना रही है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि कांशीराम अपनी बात अपने लोगों तक पहुंचाने के लिए कभी मुख्यधारा की मीडिया पर भरोसा नहीं करते थे। इसके लिए वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे। उनके द्वारा लखनऊ या दिल्ली में कही गई बात पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए समाज के सबसे निचले हिस्से के उस वोटर तक बिना लाग-लपेट पहुंच जाती थी, जो टीवी-अखबारों से दूर रहता था।
नेता के मुताबिक पार्टी आज कांशीराम की रणनीति को ही बदले हुए अंदाज में अपना रही है। अब सबसे ज्यादा लड़ाई सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही है। बहुजन समाज के युवा भी भारी संख्या में सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उनकी अपनी अच्छी-खासी फैन-फॉलोइंग भी है। पार्टी सोशल मीडिया के इन्हीं युवाओं को अपने साथ जोड़ने का काम कर रही है जो समर्पित कार्यकर्ता की भांति सोशल मीडिया पर बहुजन समाज के मुद्दे उठा रहे हैं। यह हमारे लिए ज्यादा भरोसेमंद और सस्ता है।
कार्यक्रम में शामिल एक यू-ट्यूबर ने अमर उजाला को बताया कि हमने सोशल मीडिया को ही अपनी मजबूती का आधार बनाया है। पार्टी नेताओं की बात बहुजन समाज के लोगों के बीच बेहद गंभीरता के साथ देखी और सुनी जाती है। हम उन्हीं की बातों को उन्हीं के शब्दों में यू-ट्यूब के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इससे नेताओं की बात जनता तक पहुंचती है और उसी के माध्यम से हमारी आय भी हो जाती है। उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव शेयर करते हुए कहा कि अभी यह आय इतनी ज्यादा नहीं है कि पूरी तरह उस पर निर्भर रहा जा सके, लेकिन यह इतना अवश्य है कि इसके भरोसे आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सके। इसी प्रकार के सैकड़ों लोग पार्टी की योजनाओं को बहुजन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं।