राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चार नए मंत्रियों के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बड़ा सियासी ताना-बाना बुना है। बृजेंद्र कहते हैं कि चार नए मंत्रियों में दो ओबीसी, एक दलित और एक ब्राह्मण चेहरा शामिल किया गया है। इसके अलावा यह सभी चेहरे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं। ओमप्रकाश राजभर जहां पूर्वांचल में पिछड़ों खासकर राजभर समुदाय के वोट बैंक पर दावा करते हैं। वहीं दारा सिंह चौहान का भी पूरब में पिछड़ों के नेता होने का बड़ा दावा है। राजनैतिक विश्लेषक नासिर सिद्दीकी कहते हैं कि दारासिंह चौहान पिछड़ों के नोनिया समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश में इस समुदाय का तकरीबन तीन फीसदी वोट बैंक माना जाता है। इसी तरह अनिल कुमार को मंत्रिमंडल में शामिल कर दलितों खासकर जाटव को अपने पाले में करने का बड़ा दांव चला है। सियासी जानकारों का मानना है कि दलितों में अभी भी जाटव बसपा का कोर वोट बैंक हैं। अनिल कुमार के मंत्री बनने से भाजपा को फायदा दिख रहा है।
योगी मंत्रिमंडल के विस्तार से सिर्फ दलित और ओबीसी की सियासत ही नहीं साधी गई है। बल्कि पश्चिम में ब्राह्मण चेहरे सुनील शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल कर ब्राह्मणों पर भी बड़ा दांव लगाया गया है। राजनीतिक जानकार ओमप्रकाश तंवर कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा को मंत्री बनाया जाना कई संदेश देता है। उनका कहना है कि सुनील शर्मा को मंत्री बना कर लोकसभा चुनाव में इस इलाके में आने वाली सीटों का भी समीकरण साधा है। अब देखना यह होगा कि गाजियाबाद क्षेत्र से ब्राह्मण चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल कर लोकसभा में किस तरह से प्रत्याशियों पर दांव लगाया जाता है। तंवर का मानना है कि सुनील शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल कर पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी एक संदेश दिया गया है।