फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP Assembly elections 2022: भाजपा को वोट नहीं देने की अपील कर सकता है संयुक्त किसान मोर्चा, आज करेगा मिशन यूपी का एलान

Thu, 03 Feb 2022 03:44 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। मोर्चा बृहस्पतिवार को मिशन उत्तर प्रदेश का एलान करेगा।

विज्ञापन
संयुक्त किसान मोर्चा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) पश्चिम बंगाल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी भाजपा को वोट नहीं देने की अपील कर सकता है। मोर्चा बृहस्पतिवार को मिशन उत्तर प्रदेश का एलान करेगा। इसके लिए रविशंकर मार्ग पर एक अहम बैठक होगी।

विज्ञापन


इसके बाद दिल्ली प्रेस क्लब में मीडिया समागम होगा। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल, हन्नान मोल्लाह, जगजीत सिंह धालीवाल, जोगिंदर सिंह उग्ररहा भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, शिव कुमार शर्मा कक्काजी, युद्धवीर सिंह और योगेंद्र यादव शामिल होंगे। 

दोबारा शुरू हो सकता है किसान आंदोलन

इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार को फिर से आंदोलन शुरू करने की सोमवार को चेतावनी दी थी। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि अगर सरकार पिछले साल दिसंबर में किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं करती है तो वह अपना आंदोलन फिर से शुरू करेगा। एसकेएम ने एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक समिति गठित करने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने सहित किसानों से किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है। साथ ही एसकेएम ने कहा है कि अगर सरकार अपने वादों से मुकरती रही तो किसानों के पास आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

विज्ञापन


केंद्र द्वारा अपने वादों को पूरा नहीं करने पर देश भर के हजारों किसानों ने सोमवार को 'विश्वासघात दिवस' मनाया था। एसकेएम ने कहा कि वह अपने मिशन उत्तर प्रदेश को जारी रखेगा और भाजपा को सबक सिखाने और हराने के लिए राज्य भर में अभियान चलाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों ने एक साल से अधिक समय तक दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाला था। सरकार द्वारा किसानों की मांग को मानने और छह अन्य पर विचार के लिए सहमति जताने के बाद बाद विरोध प्रदर्शन को पिछले साल नौ दिसंबर को स्थगित करने का फैसला किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें