वर्ष 2011 में देश में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के बूढ़े लोगों की संख्या 10.3 करोड़ थी। यह कुल आबादी की लगभग 8.6 फीसदी थी। बुजुर्गों की आबादी में तीन फीसदी प्रति वर्ष तक की वृद्धि हो रही है। अनुमान है कि 2050 तक देश में वृद्धों की संख्या 31.9 करोड़ (कुल का 19.5 फीसदी) हो जाएगी।
देश के 45 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों के घरों के सर्वे में यह बात सामने आई है कि अभी भी बहुत कम लोग स्वास्थ्य के लिए इंश्योरेंस की सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इनमें 26.2 फीसदी लोग किसी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस का उपयोग करते हैं, जबकि 20.7 फीसदी लोग राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का उपयोग कर रहे हैं। 2.4 फीसदी लोग सीजीएचएस की सेवा का उपयोग करते हैं तो 2.1 फीसदी लोग ईएसआईएस योजना का लाभ लेते हैं।
देश की कुल आबादी में 27 फीसदी हिस्सा 0-14 वर्ष के बच्चों का है। 61 फीसदी लोग कामकाजी आयु वर्ग (15-59 वर्ष) के बीच के हैं। इस समय यही आबादी देश की सबसे ब़ड़ी ताकत है, लेकिन लगभग 20 साल बाद इसी आबादी का बड़ा हिस्सा बूढ़ा हो जाएगा। वहीं शेष 12 फीसदी 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बूढ़े लोग हैं।
यह सर्वे सिक्किम को छोड़कर पूरे देश के 72,250 लोगों पर किया गया, जिनकी उम्र 45 वर्ष या उससे ज्यादा थी। इनमें 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के 31,464 लोग भी शामिल थे। इस रिपोर्ट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को जारी किया।
सर्वे के लिए सेंपल लेने के समय यानी वर्ष 2017-18 में देश के 38 फीसदी ग्रामीण घरों में खुले में शौच किया जाता था, शहरों में पांच फीसदी घरों में खुले में शौच किया जाता था। वृद्धजनों के लिए यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि ज्यादातर बुजुर्ग दूर चलने, शौच करने में असमर्थ हो जाते हैं।
2017-18 में कुल बुजुर्गों में सात फीसदी किसी संगठित क्षेत्र से रिटायर हुए थे, जबकि इनमें केवल 6 फीसदी ही पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे। यानी लगभग 94 फीसदी बुजुर्ग परिवार के लोगों की आय पर निर्भर रहते हैं।