MSP का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष में 163 लाख किसान गेहूं और चावल का करीब 1,208 लाख मिट्रिक टन उत्पादन करेंगे। इसकी करीब 2.37 लाख करोड़ रुपए की MSP सीधे किसानों के खाते में आएगी। गंगा के किनारों के 5 किमी के दायरे में आने वाली जमीन पर जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
खेती में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा
वित्त मंत्री ने कहा कि फसल का मूल्यांकन करने, खेती की जमीन के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण होगा। कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्यों को एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के सिलेबस बदलने को कहा जाएगा, ताकि खेती की लागत को कम किया जा सके। फलों और सब्जियों की उन्नत किस्म अपनाने वाले किसानों की मदद के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करेंगे। किसानों को डिजिटल सर्विस मिलेगी, जिसमें दस्तावेज, खाद, बीज, दवाई से संबंधित सेवाएं शामिल।
नाबार्ड से कृषि स्टार्टअप को फंडिंग
किसानों को डिजिटल और हाईटेक बनाने के लिए PPP मोड में नई योजनाएं शुरू की जाएंगी। केन-बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना शुरू होगी। यह परियोजना 44,605 करोड़ रुपए की लागत से शुरू की जाएगी। इससे 9.08 लाख हेक्टेयर खेती की जमीन को सिचाईं में मदद मिलेगी। इसके साथ ही 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। कृषि आधारित स्टार्टअप को नाबार्ड के माध्यम से फंड की सुविधा मिलेगी।