अर्थव्यवस्था के कई मानक संकेत बेहद शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। दिसंबर माह में जीएसटी संग्रह 1.29 लाख करोड़ रूपये से अधिक रहा है। पिछले छह महीने से जीएसटी संग्रह लगातार एक लाख करोड़ रूपये की सीमा से ऊपर बना हुआ है। कार कंपनियों ने साल 2021 में रिकॉर्ड 27 प्रतिशत ज्यादा कारों की बिक्री की है तो विदेशों को होने वाला निर्यात लगातार बेहतर हो रहा है। लेकिन अर्थव्यवस्था के इन बेहतर मानकों के बीच आश्चर्यजनक तरीके से बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है जिससे सरकार की परेशानी बढ़ गई है।
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार साल 2021 के अंतिम माह दिसंबर में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.84 फीसदी हो गई है। दिसंबर में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.24 फीसदी तो ग्रामीण क्षेत्रों में 7.2 फीसदी दर्ज की गई है। सितंबर महीने में बेरोजगारी दर 6.86 फीसदी, अक्टूबर में 7.75 और नवंबर महीने में 7.0 फीसदी रही है जो कि दिसंबर महीने के अंत में बढ़कर 7.91 तक पहुंच गई। विभिन्न चुनावी राज्यों में बेरोजगारी बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है, यही कारण है कि ताजा आंकड़ों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।
चुनावी राज्यों में कितनी बेरोजगारी
विधानसभा चुनावों के लिहाज से सबसे महत्त्वपूर्ण राज्य माने जा रहे उत्तर प्रदेश में इस समय बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत तो उत्तराखंड में 5.0 प्रतिशत हो गई है। गोवा में बेरोजगारी रिकॉर्ड 12 फीसदी और पंजाब में 6.8 फीसदी हो चुकी है। मणिपुर में भी बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा है।
अमर उजाला ने विभिन्न चुनावी राज्यों में मतदाताओं से मिलकर उनके लिए सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दे के बारे में जानकारी की है। युवाओं ने बेरोजगारी को अपने लिए सबसे बड़ा मुद्दा बताया है। युवाओं की शिकायत है कि पहले तो नौकरियां नहीं निकाली जातीं, और जिन नौकरियों को निकाला भी जाता है, उनकी प्रक्रिया समय से पूरी नहीं की जाती। किसी भी चुनाव में सबसे सक्रिय मतदाताओं का यह वर्ग किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर लगातार सरकार पर हमला किया है। राहुल गांधी ट्वीट के जरिए तो प्रियंका गांधी अपनी चुनावी सभाओं में लगातार इस मुद्दे को उछाल रही हैं। अखिलेश यादव ने भी सरकार पर बेरोजगारी के मुद्दे पर जमकर हमला बोला है। हालांकि, सरकार का दावा है कि उसने रिकॉर्ड चार लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं, लेकिन चुनाव के समय बेरोजगारी बढ़ने से सरकार का संकट बढ़ सकता है।