असम की विधानसभा में आरक्षण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। विधानसभा की 94 सीटों पर असम के मूल लोगों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे संगठन उल्फा (वार्ता समर्थक) का कहना है कि उन्होंने अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेज दिया है।
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल लोगों के लिए 94 विधानसभा क्षेत्रों में आरक्षण की मांग करते हुए कहा, शांति समझौते के मसौदे पर केंद्र को अपने सुझाव भेज दिए हैं। उन्होंने कहा कि उल्फा केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।
94 सीटों पर आरक्षण की मांग
संगठन के पदाधिकारी ने और उल्फा (वार्ता समर्थक) के महासचिव अनूप चेतिया ने गुरुवार को कहा कि उनका संगठन असम के मूल लोगों के लिए असम विधानसभा की 94 सीटों पर आरक्षण चाहता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद यह और भी महत्वपूर्ण है।
परिसीमन में बदले कई क्षेत्रों के नाम, असम में कुल 126 विस सीटें
गौरतलब है कि विगत अगस्त में, चुनाव आयोग ने असम में विधानसभा सीटों की संख्या 126 और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 14 बरकरार रखते हुए अपनी अंतिम परिसीमन रिपोर्ट प्रकाशित की। बता दें कि असम में सात राज्यसभा की सीटें भी हैं। परिसीमन के दौरान एक संसदीय और 19 विधानसभा क्षेत्रों के नामकरण को संशोधित किया गया।
केंद्र सरकार ने ईमानदारी दिखाई, उल्फा को समाधान की जल्द आशा
उल्फा से संबंधित दशकों पुराने मुद्दों के बारे में बात करते हुए महासचिव अनूप चेतिया ने वर्तमान सरकार पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम अपने सुझावों पर केंद्र सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। हम आशावादी हैं और केंद्र द्वारा दिखाई गई ईमानदारी की प्रशंसा करते हैं।" चेतिया के अनुसार, मुद्दों के सौहार्दपूर्ण समाधान की पूरी उम्मीद है।
CAA और नागरिक रजिस्टर पर उल्फा की मांग
चेतिया ने असम के लिए "सही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर" की भी मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को लागू करने के लिए कट-ऑफ वर्ष 2014 के बजाय 1951 होना चाहिए। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
युवा स्वार्थ के कारण प्रतिबंधित संगठन से जुड़ रहे
चेतिया ने उम्मीद जताई कि "केंद्र के साथ शांति समझौते पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएंगे", जिससे संगठन द्वारा उठाई गई समस्याओं का अंत हो जाएगा। युवाओं के उल्फा (स्वतंत्र) में शामिल होने के मुद्दे पर चेतिया ने कहा कि वे इन दिनों केवल स्वार्थ के कारण प्रतिबंधित संगठन में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "उनमें से कई लोग भगोड़े जैसी जिंदगी की कठिनाइयों का सामना नहीं कर पाने के बाद जल्द ही वापस आ जाते हैं।"
चुनावी राजनीति में प्रवेश नहीं
उल्फा (वार्ता समर्थक) के उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद लोगों की प्रमुख समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर से ही किया जाएगा। उन्होंने कहा, उल्फा को भंग कर दिया जाएगा और संगठन चुनाव लड़ने के लिए राजनीति में प्रवेश नहीं करेगा। यदि संगठन के सदस्य चुनाव में भाग लेना चाहते हैं, तो यह उनका व्यक्तिगत प्रयास होगा।"
200 से अधिक कैडरों की बैठक
खबरों के अनुसार बुधवार को काजीरंगा नेशनल पार्क के एक रिसॉर्ट में आयोजित विचार-विमर्श में उल्फा के वार्ता समर्थक संगठन के सार्जेंट रैंक से ऊपर के 200 से अधिक कैडरों ने भाग लिया। बता दें कि असम पूर्वोत्तर भारत के सेवेन सिस्टर स्टेट में एक है। फिलहाल यहां भाजपा की सरकार मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में चल रही है।