पालतू नहीं, बच्चों जैसा है सूडो...
जैसे आप अपने बच्चों को नहीं छोड़ सकते हैं, मैं और मेरा भाई हर्षित भी सूडो को कहीं नहीं छोड़ सकते हैं। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट पर पहुंचे मेडिकल के छात्र रोहित (रोहतक निवासी) ने बताया कि सात महीने पहले सूंडो को यूक्रेन में खरीदा था। मेरे घर में यहां भी दो कुत्ते हैं और मुझे इनसे बेहद प्यार है। यूक्रेन से हमारे साथ तनुजा भी साथ आईं हैं।
अलास्कन मालामुट डॉग सूंडो हमारे लिए केवल पालतू नहीं बल्कि ताउम्र इसे साथ रखेंगे। इसके पास यूक्रेन का पासपोर्ट है। यूक्रेन, भारत, दुबई और रोमानिया सहित पांच देशों में इसे मैं अपने साथ लेकर गया हूं। भारत में अलास्कन मालामुट नहीं मिलते हैं, इसकी कीमत करीब सात लाख रुपये है। पहले ही इसका वैक्सीनेशन हो चुका था, इसलिए रास्ते में अधिक दिक्कत नहीं आई। अगर थोड़ी बहुत आई भी तो हमने इसे कभी खुद अलग सोचा ही नहीं।
अड़चन के तौर पर रोमानिया में विमान में सवार होने से पहले पिंजड़े की आई। वहां मेरे वाकिफ मेयर और साथी परिमल ने महज 10 मिनट में पिंजड़ा उपलब्ध करवाया। इसके बाद सूंडो के साथ सभी भारत के लिए रवाना हुए। यूक्रेन से रोमानिया बॉर्डर में प्रवेश करने में मेरा आई पैड, मोबाइल और नकदी के तौर पर करीब ढाई लाख का नुकसान हुआ, लेकिन सूंडो के साथ सभी सुरक्षित पहुंच गए, इससे बड़ी बात और नहीं हो सकती है।