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दुखद: बीएसएफ के दो शहीदों को भुला दिया गया, शहादत सम्मान राशि की घोषणा तक नहीं की गई

Thu, 05 Aug 2021 07:07 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, रणबीर सिंह कहते हैं, बीएसएफ जवानों की सर्वोच्च शहादत को खेल की आड़ में भुला देना कहां तक उचित है। यहां उन वीरों महावीरों की बात हो रही है, जिनका पार्थिव शरीर, अंतिम संस्कार के लिए तीन दिन बाद उनके गांव में पहुंचा है। देश में ऐसा भी क्या जश्न है कि जिसमें शहादत को ही भुला दिया गया...
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बीएसएफ के शहीद - फोटो : Amar Ujala
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बीएसएफ के दो जवान सब इंस्पेक्टर भूरू सिंह व कॉन्स्टेबल राजकुमार तीन अगस्त को बांग्लादेश बॉर्डर के निकट उग्रवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। यह घटना त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई थी। बीएसएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर विद्रोही संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने घात लगाकर हमला कर दिया था। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, रणबीर सिंह का कहना है, देश ने सीमा सुरक्षा बल के दो शहीदों को भुला दिया है। उनके लिए शहादत सम्मान राशि तक की घोषणा नहीं की गई।

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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, देश में पिछले पखवाड़े से ओलंपिक खेलों के जश्न का माहौल है। देश के हर कोने, सत्ता के गलियारे या संसद, हर जगह खिलाड़ियों का जिक्र है। कहीं गोल्ड से चूकना तो कहीं चांदी का तमगा के नहीं मिलने का मलाल। खिलाड़ियों पर धनवर्षा का होना लाजिमी है। विभिन्न खेल संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की राशि का एलान करने की होड़ मची है। खिलाड़ियों के साथ सेल्फी पोज लेने का जुनून है। गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे, सोशल मीडिया, टीवी चैनल, समाचार पत्रों में सिर्फ खिलाड़ियों का जिक्र है कि चलो कांस्य पदक ही सही।

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, रणबीर सिंह कहते हैं, बीएसएफ जवानों की सर्वोच्च शहादत को खेल की आड़ में भुला देना कहां तक उचित है। यहां उन वीरों महावीरों की बात हो रही है, जिनका पार्थिव शरीर, अंतिम संस्कार के लिए तीन दिन बाद उनके गांव में पहुंचा है। देश में ऐसा भी क्या जश्न है कि जिसमें शहादत को ही भुला दिया गया। देश की पहली रक्षा पंक्ति 'बीएसएफ' के जांबाजों, जिहोंने देश की आन-बान और शान के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उनके लिए शहादत सम्मान राशि की घोषणा न करना, शहादत का सरासर अपमान है। जो राष्ट्र अपने शहीद परिवारों को सम्मान देने में कोताही बरतते हैं, वहां पीड़ित परिवार के मासूम बच्चों पर क्या गुजरती होगी। उनके बच्चों की शिक्षा का खर्च अब कौन उठाएगा। शहीद सिपाही राजकुमार के तीन छोटे बच्चे हैं। उनके लालन पालन का सवाल देशवासियों के सामने मुंह बाए खड़ा है। बीएसएफ के शहीद जवानों के परिवारों के लिए बिना कोई देरी किए राज्य सरकारें एक करोड़ रुपये बतौर शहीद सम्मान राशि की घोषणा करें।

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