तुषार गांधी ने कहा कि उन्होंने अपने वकील के जरिए शिवाजी नगर की जिला एवं सत्र अदालत में पुणे पुलिस के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसने पिछले महीने दक्कन जिमखाना पुलिस थाने में दायर उनके आवेदन पर कथित तौर पर कार्रवाई नहीं की।
एक सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस अपने कर्तव्यों को भूल रही है और राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।' तुषार गांधी ने कहा कि जब उन्होंने भिडे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिया तो पुलिस ने कहा कि वे मामले में आगे बढ़ने से पहले कानूनी राय लेंगे।
उन्होंने कहा,'तबसे वे टाल-मटोल कर रहे हैं और कोई ठोस कारण (भिडे के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने के लिए) नहीं दे रहे हैं। चूंकि हमारे आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए हमें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा और भिडे के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज करनी पड़ी।'
गांधी अपने वकील और कुछ अन्य लोगों के साथ दक्कन जिमखाना पुलिस थाने गए थे और उन्होंने दक्षिणपंथी नेता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 499 (मानहानि) और 505 (सार्वजनिक शरारत को बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी।
गांधी ने तब कहा, 'भिडे ने न केवल बापू के खिलाफ बल्कि उनके परिवार के खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणी की थी।' भिडे पर जुलाई के अंतिम सप्ताह में अमरावती जिले में एक कार्यक्रम में बोलते हुए महात्मा गांधी के वंश के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। उनकी टिप्पणी के बाद अमरावती और नासिक में श्री शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन के संस्थापक भिडे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।