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Supreme Court: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के चार सदस्यों को राहत, गिरफ्तारी से सुरक्षा दो सप्ताह के लिए बढ़ी

Fri, 15 Sep 2023 10:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मणिपुर सरकार ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसी को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ईजीआई ने अपने सदस्यों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर रद्द कराने की मांग की थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तारी से सुरक्षा दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता से यह भी जानना चाहा कि मणिपुर में एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों के खिलाफ समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपराध कैसे बनता है?

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रिपोर्ट सही या गलत हो सकती है, यही अभिव्यक्ति की आजादी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्रकार की रिपोर्ट सही या गलत हो सकती है। अभिव्यक्ति की आजादी का यही मतलब है। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ शुक्रवार को पूछा कि हिंसाग्रस्त मणिपुर गए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) के चार सदस्यों के खिलाफ केस को रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए? साथ ही शिकायतकर्ता से यह स्थापित करने को कहा कि उन पर विभिन्न जातीय समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपराध कैसे बनता है।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, पत्रकार सही या गलत हो सकते हैं। पूरे देश में हर दिन गलत चीजें रिपोर्ट की जाती हैं। क्या अथॉरिटी पत्रकारों पर मुकदमा चलाएगी? शिकायतकर्ता के वकील गुरु कृष्ण कुमार ने पत्रकारों की रिपोर्ट को एकतरफा बताते हुए कहा, यदि एडिटर्स गिल्ड अपनी रिपोर्ट वापस ले लेता है, तो समस्या का अंत हो जाएगा। सीजेआई ने कुमार से कहा, हमें बताएं कि इस रिपोर्ट से धारा 153ए और अन्य अपराध कैसे बनते हैं। पत्रकार अपना दृष्टिकोण रखने के हकदार हैं। यह एक रिपोर्ट है। आपको अपनी शिकायत को उसी रूप में देखना होगा, जैसे वह है। प्रतिक्रिया को भूल जाइए और अपनी शिकायत के माध्यम से स्थापित करें कि ये अपराध कैसे बनते हैं।
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आपको दिखानी होगी शिकायत : सीजेआई
शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि एफआईआर सभी तथ्यों का इनसाइक्लोपीडिया नहीं है। अथॉरिटी से मामले की जांच करने के लिए कहा जाए। इस पर सीजेआई ने कहा, इस तरह के मामले में आपको हमें अपनी शिकायत दिखानी होगी। क्या इससे अपराध के अवयवों की भनक भी लगती है। पीठ ने शिकायतकर्ता को दो हफ्ते में जवाब मांगा है।

एफआईआर रद्द कराने की मांग
मणिपुर सरकार ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसी को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ईजीआई ने अपने सदस्यों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर रद्द कराने की मांग की थी। 

चार सितंबर को कराया था केस दर्ज
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने चार सितंबर को कहा था कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और तीन सदस्यों के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया है और उन पर राज्य में हिंसा भड़काने की कोशिश के आरोप हैं। मानहानि के अतिरिक्त आरोप के साथ चार सदस्यों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।

क्या है मामला?
बता दें कि हाल ही में एडिटर्स गिल्ड ने दावा किया था कि मणिपुर की जातीय हिंसा पर एक पक्षीय मीडिया रिपोर्टिंग हुई है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पर पक्षपात करने का भी आरोप लगाया। एडिटर्स गिल्ड के जिन सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें एडिटर्स गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा और तीन सदस्य सीमा गुहा, भारत भूषण और संजय कपूर का नाम शामिल है। सीमा गुहा, भारत भूषण और संजय कपूर ने बीते हफ्ते मणिपुर का दौरा कर यहां हुई मीडिया रिपोर्टिंग का अध्ययन किया था। 

वहीं, एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों की रिपोर्ट को मणिपुर सरकार ने फर्जी और स्पॉन्सर बताया था। एफआईआर में बताया गया कि रिपोर्ट में गलत तथ्य बताए गए। जुलाई में भी मणिपुर सरकार ने तीन महिलाओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। इन महिलाओं की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने भी राज्य में जारी हिंसा को सरकार द्वारा स्पॉन्सर बताया था।

संस्थागतकरण भी कार्यक्षेत्र को मानवीय बनाता है: CJI
दिल्ली में राम जेठमलानी के जन्म शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपनी बात भी रखी। मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस के रूप में अपने 10 महीने के कार्यकाल के दौरान मुझे एहसास हुआ कि पारदर्शिता बढ़ाने के अलावा संस्थागतकरण भी कार्यक्षेत्र को मानवीय बनाता है। कर्मचारी ऐसा करने में सक्षम हैं। काम और घर के बीच सीमाएं बनाएं और उनकी कार्यकुशलता बढ़ाएं।
 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
उच्च न्यायालयों से डिजिटल माध्यम से सुनवाई की स्थिति पूछी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी उच्च न्यायालयों और कुछ न्यायाधिकरणों से इस बात का जवाब देने को कहा कि उन्होंने मामलों की सुनवाई के हाइब्रिड तरीके को खत्म कर दिया है या नहीं। ‘हाइब्रिड’ यानी वकीलों और वादियों के पास किसी मामले में अदालत में स्वयं पेश होने के अलावा वीडियो-कांफ्रेंस के जरिए पेशी का भी विकल्प भी होता है। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों के महापंजीयकों और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी), राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) एवं राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के पंजीयकों को नोटिस जारी कर उनसे एक हलफनामा दाखिल करने को कहा।

पूरे देश में महिला सहायता एकीकृत प्रणाली लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में महिला एकीकृत सहायता प्रणाली लागू करने के लिए राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) से रिपोर्ट मांगी है। दरअसल एक याचिका में NALSA के महिला सहायता एकीकृत प्रणाली को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट पायलट स्तर पर जम्मू कश्मीर और छत्तीसगढ़ में बीते तीन सालों से चल रहा है। इस प्रणाली के तहत 181 महिला हेल्पलाइन, NALSA की कानूनी सहायता वाली हेल्पलाइन 15100 और अन्य सभी सरकारी योजनाओं को एकीकृत किया जाना है। 

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मांगा जवाब

- फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेजों में 70 प्रतिशत मेडिकल इंटर्न्स को अनिवार्य वजीफा नहीं मिलने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस को इसके मेडिकल इंटर्न्स को एक अक्तूबर 2023 से 25 हजार रुपए का वजीफा देने का निर्देश दिया है। दरअसल एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर वजीफा ना मिलने का आरोप लगाया है।  

हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन मामला

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय और एक जिला अदालत को एल नागेश्वर राव समिति की कामकाज से संबंधी आदेश को पारित करने से रोक दिया है। नागेश्वर राव समिति का गठन हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चुनाव पर नजर रखने के लिए किया गया था। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने इस संबंध में कई आदेश दिए हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में ऐसी सुनवाई पर रोक लगा दी। 

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी गई थी, जिसमें कुछ लोगों के मोबाइल फोन  इंटरसेप्ट करने की इजाजत दी गई थी। राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने सरकार के विभिन्न आदेशों पर रोक लगा दी थी। राजस्थान सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी के मोबाइल को इंटरसेप्ट करने के आदेश दिए गए थे और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत थे और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की धारा 5 के तहत यह आदेश दिए गए थे।  

कुलपतियों की नियुक्ति के लिए गठित की जायेगी सर्च कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के 13 सरकारी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए एक सर्च कमेटी गठित की जाएगी। इसके लिए राज्यपाल, राज्य सरकार और यूजीसी से तीन-पांच नाम सुझाने को कहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सर्च कमेटी बनाने की बात कही।  
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अफजाल अंसारी की याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस
माफिया मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से बसपा के निवर्तमान सांसद अफजाल अंसारी की ओर से दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने की। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को तय की है। अफजाल अंसारी ने गैंगस्टर एक्ट मामले में उन्हें दोषी ठहराने के निचली अदालत के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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