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असंतोष: उत्तराखंड के बाद अब कर्नाटक में नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी, येदियुरप्पा को हटाने की मांग

Fri, 28 May 2021 04:05 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • पर्यटन मंत्री सहित कई मंत्रियों-विधायकों ने दिल्ली में डाला डेरा
  • येदियुरप्पा पर भारी पड़ सकता है पुत्रमोह, राज्य संगठन में बेटे को बनवाया उपाध्यक्ष।
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बीएस येदियुरप्पा - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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उत्तराखंड के बाद अब कर्नाटक में भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के एक धड़े ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पर्यटन मंत्री सीपी योगेश्वर की अगुवाई में आधा दर्जन मंत्री और दो दर्जन विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। इन विधायकों को उम्मीद है कि पार्टी नेतृत्व उत्तराखंड की तरह ही कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के लिए मजबूर होगा।

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों और विधायक पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करना चाहते हैं। हालांकि इन्हें अब तक इनके यहां से बुलावा नहीं आया है। उधर येदियुरप्पा समर्थक राजस्व मंत्री ने पहली बार स्वीकार किया है कि सरकार के कई मंत्री और विधायक दिल्ली में नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान में कई विधायक शामिल हैं और इनकी बृहस्पतिवार को भी कई जगहों पर बैठक हुई है।

येदियुरप्पा के अभियान से आई गर्मी
सूत्र बताते हैं कि नए सिरे से असंतोष का कारण येदियुरप्पा की ओर से हो रही कोशिशें हैं। 78 वर्षीय येदियुरप्पा ने बीते साल अपने पुत्र बीवाई विजयेंद्र को राज्य संगठन में उपाध्यक्ष बनवाया। उनकी कोशिश अपनी विरासत अपने इसी पुत्र को सौंपने की है। इस दिशा में वह बीते एक साल से लगातार प्रयास कर रहे हैं। जबकि पार्टी के दूसरे नेताओं को लगता था कि पहले ही 75 वर्ष की उम्र का पैमाना पार कर चुके येदियुरप्पा के लिए पार्टी नेतृत्व जल्द ही विकल्प तलाशेगा।
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असमंजस में आलाकमान
दरअसल येदियुरप्पा कर्नाटक में पार्टी के सर्वाधिक कद्दावर नेता हैं। स्वजातीय ताकतवर लिंगायत बिरादरी पर उनकी पकड़ जबर्दस्त है। सच्चाई यह भी है कि दक्षिण के राज्य कर्नाटक में कमल खिलाने में सर्वाधिक योगदान येदियुरप्पा का ही रहा है। यही कारण है कि येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा राज्य में औंधे मुंह गिरी थी। पार्टी के पास उनकी कद का कोई दूसरा चेहरा नहीं है। यही कारण है कि उनके खिलाफ एक धड़े की बगावत के बावजूद भाजपा नेतृत्व इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले रहा है।

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