36 साल पुराने असम समझौते को लागू करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए असम सरकार ने आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है। असम समझौता क्रियान्वयन विभाग के आयुक्त व सचिव जीडी त्रिपाठी ने एक उप-समिति गठित करने की अधिसूचना जारी की है, जो तीन माह के भीतर रिपोर्ट पेश करेगी।
तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करेगा पैनल
अधिसूचना में में कहा गया है- असम समझौते के सभी खंडों को लागू करने के लिए रूपरेखा तैयार करने वाली समिति का गठन किए जाने पर राज्यपाल ने हर्ष व्यक्त किया है। उच्च स्तरीय समिति खासतौर पर खंड-6 का परीक्षण और इसे लागू करने की रूपरेखा पेश करेगी।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट की खारिज
पिछले साल 25 फरवरी को गृह मंत्रालय की ओर से जस्टिस बिप्लब कुमार सरमा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी। लेकिन, इस साल असम विधानसभा चुनाव से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 फरवरी को कहा था कि सरकार सिफारिशों को लागू नहीं कर सकती, क्योंकि वे कानूनी वास्तविकता से परे हैं।
सर्वांगीण आर्थिक विकास की संभावनाओं पर नजर
समिति खंड 7, 9 व 10 को लागू करने की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन, बाढ़, अपरदन जैसे मसलों को हल करने की रूपरेखा भी पेश करेगी। समिति रिपोर्ट तैयार करते समय राज्य के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर विचार करेगी।
यह कहता है खंड-6
असम समझौते के खंड -6 के अनुसार, असम के लोगों की संस्कृति, सामाजिक, भाषाई पहचान और विरासत के संरक्षण, रक्षा और प्रोत्साहन के लिए यथोचित संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा खंड-9 को लागू करने को लेकर भी कभी संतोषजनक कदम नहीं उठाए गए। इसमें कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा को बंद किया जाएगा और सीमा पर गश्ती बढ़ाई जाएगी, इसके अलावा भविष्य में घुसपैठियों को रोकने के बंदोबस्त किए जाएंगे।