टीएमसी के प्रतिनिधियों ने शनिवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में दावा किया कि समिति की रिपोर्ट को सदन में पेश किए जाने से पहले सार्वजनिक किया गया। लोकसभा और राज्यसभा में टीएमसी के संसदीय दल के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और डेरेक ओ ब्रायन ने बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। सूत्रों के मुताबिक,बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ सांसद पहले से ही संदेह में हैं। उन्होंने मीडिया में खबरें देखी हैं कि टीएमसी के एक सदस्य को जल्द ही निष्कासित किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने रिपोर्ट पेश किए जाने से पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि चर्चा के बाद सदन को फैसला करना चाहिए। नियमों के मुताबिक मोइत्रा को तभी निष्कासित किया जा सकता है जब सदन समिति की सिफारिश के पक्ष में मतदान करे। समिति ने नौ नवंबर को हुई बैठक में उन्हें लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश करने वाली अपनी रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बंद्योपाध्याय और ओ'ब्रायन ने सरकार पर समय की बर्बादी के लिए सर्वदलीय बैठकें कम करने का भी आरोप लगाया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सर्वदलीय बैठकों में चर्चा किए बिना विधेयकों को संसद में ला रही है। उन्होंने सरकार से आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए तीन-तीन विधेयकों को पारित न करने का भी आग्रह किया।
वहीं, इस मामले पर भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी कहा कि आचार समिति पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। संसद का शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होगा। इसमें कोई राजनीति नहीं है। महुआ मोइत्रा ने जो किया है, चाहे वह टीएमसी से हों या कांग्रेस..यह राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में है। उच्च पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति की कोई न कोई जिम्मेदारी होती है। महुआ मोइत्रा ने जो किया है, उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए। जो भी पार्टी बीच में आती है, राष्ट्रीय हिंत के लिए उसकी चिंता संदिग्ध है। 130 करोड़ लोग ऐसे लोगों का कभी समर्थन नहीं करेंगे।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने किया मोइत्रा का समर्थन
वहीं, इस मामले में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने महुआ मोइत्रा के प्रति समर्थन जताया है और सरकार की जांच के लिए उन्हें हटाने के लिए लोकसभा की आचार समिति के कथित अनैतिक आचरण की आलोचना की। उन्होंने यह भी सवाल किया कि इस मुद्दे पर आचार समिति की बैठक में हुई गोपनीय चर्चा को सार्वजनिक कैसे किया गया।
चौधरी की टिप्पणी स्पीकर ओम बिरला को लिखे उनके पत्र के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संसदीय समितियों को संचालित करने वाले नियमों और प्रक्रियाओं के पुनर्मूल्यांकन का आह्वान किया था। लोकसभा की आचार समिति में पिछले महीने बहुमत से पारित एक रिपोर्ट में मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की सिफारिश की गई थी, जिसमें उन पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के इशारे पर संसद में सवाल उठाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।