केंद्र ने किसानों को बिना शर्त खुले मन से बातचीत करने का प्रस्ताव दिया था। इस पर पहली बार पंजाब के 32 किसान नेताओं ने दोपहर तीन बजे केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात की। यह मीटिंग लगभग तीन घंटे चली। केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और पूर्व मंत्री सोम प्रकाश भी शामिल रहे। यह बैठक दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई। पहले दौर की इस बातचीत में केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित कर मामले का हल निकालने का प्रस्ताव रखा जिसे किसानों ने सिरे से नकार दिया। इसी दिन दूसरे दौर की वार्ता शाम सात बजे हुई जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
तीसरे दौर की वार्ता में 40 किसान नेता शामिल थे। विज्ञान भवन में हुई इस बैठक में किसानों ने सरकार का दिया हुआ खाना नहीं खाया। किसानों ने अपने लिए सिंधु बॉर्डर से ही भोजन, चाय का प्रबंध किया था। यह बैठक भी बेनतीजा रही। कुछ किसान नेताओं ने कृषि मंत्री से मिलकर बातचीत की। अन्य किसान नेताओं ने अनौपचारिक वार्ता का विरोध जताया और कहा कि सरकार केवल हमसे बातचीत करे।
पांचवें दौर की इस बैठक में किसानों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पांच घंटे तक चली बैठक में किसानों ने प्लाकार्ड्स दिखाए और कहा कि सरकार बताए कि उसने किसानों की मांगों पर अब तक क्या निर्णय लिया।
किसानों ने भारत बंद आयोजित किया। इसका आंशिक असर रहा। पंजाब-हरियाणा में बंद का ज्यादा प्रभाव देखा गया।
मानवाधिकार दिवस के दिन किसान आंदोलन में दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद के पोस्टर लहराए गए। उनकी रिहाई की मांग की गई। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के इस कार्यक्रम से संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने को अलग कर लिया। संगठन ने कहा कि ये आंदोलन का हिस्सा नहीं है। इसके पहले आंदोलन में कुछ खालिस्तानी नेताओं के फोटो भी आंदोलन स्थल पर दिखाई पड़े थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कच्छ दौरे के बीच यहां के किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि क्या जब दूध लेने का ठेका होता है तो क्या ठेकेदार गाय भी ले जाता है। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में किसान की जमीन सुरक्षित रहेगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा के पटल पर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ीं। विधानसभा में 'जय जवान, जय किसान' के नारे लगाए गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के किसानों को संबोधित किया।
छठे दौर की वार्ता के लिए नौ दिसंबर का समय निश्चित किया गया था। लेकिन इसके पूर्व केंद्रीय मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से कुछ किसान नेताओं ने मुलाकात की। इसके बाद छठें दौर की वार्ता को स्थगित कर दिया गया। अमित शाह ने भी किसानों से कई दौर में बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन इसका अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
आंदोलन की शुरूआत के पहले केंद्र सरकार ने किसानों से बातचीत का प्रस्ताव दिया था। किसानों को दिल्ली बुलाकर 14 अक्तूबर और 13 नवंबर 2020 को बातचीत की गई थी। किसानों ने शिकायत की थी कि पहली बैठक में केवल अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। मंत्री शामिल नहीं हुए। बाद में मंत्री भी शामिल हुए, लेकिन किसानों ने कानून वापसी के अलावा कोई अन्य बात करने से मना कर दिया।
इससे पहले 29 नवंबर के दिन मन की बात कार्यक्रम में और 30 नवंबर को वाराणसी में एक कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को कहा कि ये कानून किसानों के हित के लिए बनाए गए हैं।
25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अटल बिहारी वायपेयी के जन्मदिन पर देश के नौ करोड़ किसानों को 18 हजार करोड़ रुपये की किसान सम्मान निधि जारी करेंगे। देश के हर ब्लॉक स्तर पर होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और संगठन के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।