फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नफरत भरे भाषणों की जांच की मांग: धर्मसंसद के खिलाफ तीन सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

Sun, 16 Jan 2022 02:35 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस रिट याचिका में पिछले साल 17 से 19 दिसंबर के बीच हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के खिलाफ जांच की मांग की गई है।
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय सेना के तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों ने हरिद्वार और दिल्ली धर्म संसद में दिए गए कथित नफरत भरे भाषणों की जांच के लिए एक नया विशेष जांच दल नियुक्त करने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

विज्ञापन


संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस रिट याचिका में पिछले साल 17 से 19 दिसंबर के बीच हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के खिलाफ जांच की मांग की गई है।

यह याचिका मेजर जनरल एसजी वोम्बटकेरे, कर्नल पीके नायर और मेजर प्रियदर्शी चौधरी ने दायर की है। मेजर जनरल वोम्बतकेरे ने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ सियालकोट सेक्टर में युद्ध लड़ा था और वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आधार अधिनियम के अधिकार को चुनौती देने वाले प्रमुख याचिकाकर्ताओं में से एक थे। कर्नल नायर ने 30 वर्षों तक सेना कोर ऑफ इंजीनियर्स में सेवा दी और 1971 में बांग्लादेश में युद्ध में भाग लेने के अलावा अपनी रेजिमेंट, बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में मुस्लिम सैनिकों की कमान संभाली थी। मेजर चौधरी को आतंकवाद विरोधी अभियान में वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।
विज्ञापन


वकील सेंथिल जगदीशन के माध्यम से दायर की गई याचिका में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले वीडियो का उल्लेख किया गया है, जहां अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नरसंहार के लिए खुलेआम आह्वान किया गया है। याचिका में कहा गया है, एक भाषण में विशेष रूप से पुलिस और सेना से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार उठाने का आह्वान किया गया था। इस तरह का कार्यक्रम दिल्ली में भी आयोजित किया गया था।

घटना के एक वीडियो से एक सज्जन को लोगों के एक समूह को भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए लोगों के एक समूह को ‘मरने या मारने’ की शपथ दिलाते देखा जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के देशद्रोही और विभाजनकारी भाषण न केवल देश के आपराधिक कानून का उल्लंघन करते हैं बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-19 के मूल पर भी प्रहार करते हैं। ये भाषण राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर दाग लगाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने की गंभीर क्षमता रखते हैं। वहीं, सूत्र बताते हैं कि इस कार्यक्रम से विश्व हिंदू परिषद का कोई लेना-देना नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें