हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ दुनिया भर में वातावरण बनाने के प्रयास के बीच यूपी चुनाव से पूर्व वाराणसी में नवंबर में संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सनातन धर्म के चुनिंदा विद्वानों, धर्माचार्यों और नेताओं की जमघट होगी। गंगा महासभा द्वारा नवंबर में होने वाले तीन दिवसीय सम्मेलन में सनातन धर्म की विशेषताओं, चुनौतियों और भावी योजनाओं पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम में शंकराचार्यों, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, संघ और विश्व हिंदू परिषद के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
संस्कृति संसद के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया गया है। तीन दिन के सम्मेलन में करीब चार सौ हस्तियां हिस्सा लेंगी।
गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संस्कृति संसद के जरिये हम सनातन धर्म में सुधार पर चर्चा के साथ अमेरिका में हिंदू विरोधी कार्यक्रम करने वालों को जवाब भी देंगे।
इस समय हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ दुनिया भर में एक वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हम इस कार्यक्रम के जरिये अपने आलोचकों को सनातन धर्म की विशेषताओं से अवगत कराएंगे।
हिंदू होलोकास्ट पर विशेष चर्चा
संस्कृति संसद में बारह अलग-अलग सत्र होंगे। इसमें पहला सत्र सनातन धर्म के अनुत्तरित प्रश्न विषय पर होगा। इस सत्र में पांच हजार साल तक सनातन धर्म में कोई संहिता या ग्रंथ क्यों नहीं लिखा गया इस पर भी चर्चा होगी।
हिंदू संस्कृति पर दो हजार सालों तक लगातार हमले हुए। जनसंहार किया गया। संस्कृति संसद में उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991 पर भी चर्चा होगी। अंतिम सत्र में धर्मनिरपेक्षता पर विस्तार से चर्चा होगी
12 से 14 नवंबर को होगा कार्यक्रम
यह कार्यक्रम 12 से 14 नवंबर के बीच होगी। गौरतलब है कि अगले साल फरवरी-मार्च में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में धर्मनिरपेक्षता आदि विषयों पर सामने आने वाली राय की वृहद चर्चा होगी।