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Modi 3.0: मोदी के 'संकटमोचक' बनेंगे ये खास मंत्री, इन समीकरणों के चलते मंत्रिमंडल में मिली जगह

अमित शर्मा
Updated Sun, 09 Jun 2024 10:50 PM IST

सार

Modi 3.0: राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री के सबसे भरोसेमंद सहायक बनकर उभरे हैं। वे मोदी की नीतियों के सबसे प्रबल समर्थक माने जाते हैं। इस बार भी उन्हें मंत्री बनाया गया है और इस बार भी उन्हें सबसे प्रमुख मंत्रालयों में से कोई एक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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इन समीकरणों को साधने के लिए इन चेहरों को मिली मोदी 3.0 कैबिनेट में जगह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री के सबसे भरोसेमंद सहायक बनकर उभरे हैं। वे मोदी की नीतियों के सबसे प्रबल समर्थक माने जाते हैं। इस बार भी उन्हें मंत्री बनाया गया है और इस बार भी उन्हें सबसे प्रमुख मंत्रालयों में से कोई एक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। चुनावों में कथित तौर पर राजपूत मतदाताओं की भाजपा से नाराजगी के कारण उसे काफी नुकसान हुआ है। राजनाथ सिंह जैसे मजबूत राजपूत नेता को आगे बढ़ाकर भाजपा ने राजपूत मतदाताओं को अपना संदेश देने की कोशिश की है। राजपूत समुदाय से गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने भी राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली है।


आरएलडी नेता जयंत चौधरी को मोदी मंत्रिमंडल में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय के मतदाताओं को साधने में वे भाजपा की मदद कर सकते हैं। चूंकि, इसी क्षेत्र से जाट समुदाय के बड़े नेता संजीव बालियान चुनाव हार चुके हैं, इस नई जिम्मेदारी के बाद जयंत चौधरी पश्चिमी यूपी में बड़े नेता के तौर पर उभर सकते हैं। 


कांग्रेस से भाजपा में आए जितिन प्रसाद मोदी सरकार में एक ब्राह्मण चेहरे के तौर पर शामिल किए गए हैं। राज्य मंत्री के रूप में उन्हें यूपी में बड़ी पहचान मिली है। कुर्मी समुदाय के बड़े नेता बनकर उभरे महराजगंज से सांसद पंकज चौधरी को शपथ दिलाकर मोदी ने पूर्वांचल में कुर्मी वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। बीएल वर्मा को भी राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है।


अपना दल (एस) नेता अनुप्रिया पटेल को भी राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल कुर्मी वोट बैंक की बड़ी नेता के तौर पर देखी जाती हैं। उन्हें मंत्री बनाकर मोदी ने पूर्वांचल के कुर्मी वोट बैंक को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। पूर्वांचल में भाजपा को मजबूत बनाने में अनुप्रिया पटेल की भूमिका महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।


बांसगांव से सांसद कमलेश पासवान को राज्य मंत्री बनाकर मोदी ने दलित समुदाय को साधने का काम किया है। आगरा से भाजपा सांसद एसपी सिंह बघेल एक बार फिर एनडीए सरकार में प्रतिनिधित्व करते हुए दिखाई पड़ेंगे। वे ओबीसी समुदाय के बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं।  


बिहार-झारखंड

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को मंत्रिमंडल में शामिल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी-बिहार और झारखंड के दलितों-महादलितों के बीच बहुत सकारात्मक संदेश देने का काम किया है। गया से सांसद जीतन राम मांझी को केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।   
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जदयू के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी आज केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले नेताओं में शामिल हैं। भूमिहार जाति के इस नेता को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर एनडीए ने बिहार की जातीय राजनीति में भूमिहारों को अपने साथ जोड़ने का काम किया है। बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह भी भूमिहार समुदाय से आते हैं। मोदी के सबसे प्रबल समर्थकों में उन्हें गिना जाता है और अपने बयानों के कारण मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं। उन्हें भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। 


निषाद समुदाय से आने वाले राजभूषण चौधरी को राज्यमंत्री बनाकर भाजपा ने अगले बिहार विधानसभा चुनावों की रणनीति को साधने की कोशिश की गई है। रामनाथ ठाकुर ने जेडीयू के दूसरे मंत्री के रूप में शपथ ली है। उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने का काम किया है। नित्यानंद राय यादव समुदाय के नेता हैं। बिहार में तेजस्वी यादव का जातीय तिलस्म तोड़ने में अब तक असफल रही भाजपा इन्हीं नेताओं के भरोसे बिहार के यादव समुदाय में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। राज्य मंत्री बने सतीश दुबे राज्य में ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।


लोजपा नेता चिराग पासवान (रामविलास पासवान गुट) भाजपा के सबसे विश्वस्त सहयोगी बनकर उभरे हैं। महादलित समुदाय से आने वाले चिराग पासवान मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम करेंगे।      


झारखंड से आने वालीं अन्नपूर्णा देवी यादव केंद्र सरकार में राज्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे पिछली सरकार में भी मंत्री रही हैं। कोडरमा से जीतकर आने वाली अन्नपूर्णा राज्य में मजबूत नेताओं में गिनी जाती हैं। रांची से सांसद संजय सेठ को भी राज्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।    


गुजरात

अमित शाह एक बार फिर मोदी सरकार में मजबूत मंत्रालय संभालते हुए दिखाई दे रहे हैं। मोदी 2.0 सरकार में उन्होंने गृह मंत्रालय संभाला था और मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसलों को लागू करने में उनकी भूमिका सबसे मजबूत मानी जाती है। माना जा रहा है कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने इस बार भी उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। सीएए कानून बनाने, कश्मीर से विवादित अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों की समाप्त करने में उनकी भूमिका सबसे आगे रही है। मोदी 3.0 में यदि सरकार के लिए संख्या बल से जुड़ा कोई सवाल आया तो एक बार फिर उनकी भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण रहने वाली है। 


पूर्व विदेश मंत्री एस जयशंकर बिहार से आते हैं, लेकिन वे इस समय गुजरात का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विदेश नीति के मामले में वे सरकार के लिए सबसे बड़े संकटमोचक बनकर उभरे हैं। चीन के साथ संबंध हों या रूस-अमेरिका रिश्तों पर उनकी बेबाक टिप्पणी मोदी के विचारों के बिल्कुल अनुरूप मानी जाती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है।


गुजरात में भाजपा को प्रचंड जीत दिलाने के पीछे सबसे प्रमुख भूमिका निभाने वाले सीआर पाटिल ने भी मोदी 3.0 में मंत्री के रूप में शपथ ली है। उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी उनको इनाम दे सकती है। अमित शाह के बाद उन्हें भाजपा के सबसे बड़े राजनीतिक चाणक्यों के रूप में देखा जाता है। डॉ. मनसुख मंडाविया को गुजरात से भाजपा के प्रमुख नेताओं में देखा जाता है। पोरबंदर से सांसद मंडाविया की स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भूमिका अब तक बहुत सराहनीय रही थी। इसके अलावा नीमूबेन बमभानिया को भी गुजरात कोटे से राज्यमंत्री बनाया गया है।

 

पश्चिम बंगाल

शांतनु ठाकुर पश्चिम बंगाल में भाजपा के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का विषय उठाकर भाजपा ने इस वर्ग के सहारे पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी पैठ मजबूत बनाई है। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिल सकी है, लेकिन एक बार फिर यदि वह इस राज्य में मजबूत होने की कोशिश करती है, तो उसे मतुआ समुदाय सहित प्रमुख वर्गों को साधने की कोशिश करेगी। शांतनु ठाकुर को मंत्री बनाकर मतुआ समुदाय को यही संदेश दिया गया है। प. बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष और बलूरघाट से सांसद सुकांतो मजूमदार को भी मोदी सरकार में राज्यमंत्री के रुप में शपथ दिलाई गई है। 


ओडिशा

ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान प्रधानमंत्री के विश्वासपात्र नेताओं में माने जाते हैं। अब तक उन्हें ओडिशा के अगले मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन अब उन्हें केंद्र में लाकर मोदी ने शिक्षा मंत्रालय में उनकी भूमिका को आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं। आदिवासी नेता जोएल ओराम को भी मंत्री पद की शपथ दिलाकर मोदी ने ओडिशा के आदिवासी मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।  


प्रह्लाद जोशी संसदीय कार्य मंत्री के रूप में पिछली सरकार में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। इस बार भी इस ब्राह्मण नेता को शामिल कर भाजपा ने कर्नाटक को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेलवे को आधुनिक बनाकर और उसका विस्तार कर देश के विकास का इंजन मजबूत करने का सपना देखते रहे हैं। अश्विनी वैष्णव उनका यह सपना बहुत सफलतापूर्वक आगे बढ़ाते रहे हैं। यही कारण है कि ओ़डिशा कैडर के पूर्व आईपीएस को एक बार फिर मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। माना जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में भी वे इसी जिम्मेदारी को आगे बढ़ाते हुए देखे जा सकते हैं। यह मोदी सरकार का सपना पूरा करते हुए देखे जा सकते हैं। 


पूर्वोत्तर 

भाजपा ने पिछले दस सालों में पूर्वोत्तर में अपनी जड़ें मजबूती के साथ जमा ली हैं। असम, त्रिपुरा के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी उसकी पकड़ मजबूत हुई है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पूर्वोत्तर के चेहरे के तौर पर मंत्रिमंडल में जगह देकर भी पूर्वोत्तर की नब्ज को साधने की कोशिश की गई है। 


अरुणाल प्रदेश से आने वाले किरेन रिजीजू को भी एक बार फिर मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। पूर्वोत्तर के मामलों में वे पूरे देश में बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। कानून और युवा मामलों में काम करने के लिए उनकी भूमिका सराहनीय रही है।  


अन्य मंत्री भी दे रहे खास संदेश

माना जाता है कि भूपेंद्र यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल हैं। अलवर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे भूपेंद्र यादव पर्यावरण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान के दूसरे नेता गजेंद्र सिंह शेखावत भी जल संसाधन के लिए काम करने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें भी दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। वे राजस्थान में भाजपा के प्रति राजपूत मतदाताओं की नाराजगी दूर करने का काम कर सकते हैं। 


हरदीप सिंह पुरी को पंजाब में भाजपा की साख मजबूत करने वाले नेताओं के रूप में देखा जाता है। सिख समुदाय और पंजाबी समुदाय को साधने के लिए उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी दी गई है। तेलंगाना में भाजपा को मजबूत करने वाले जी. किशन रेड्डी को भी मंत्री बनाया गया है। रामदास अठावले दलित नेता के रूप में मोदी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री के रूप में काम करेंगे। बंडी संजय को तेलंगाना में पार्टी को मजबूत करने का ईनाम मिला है और उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया है।


सुरेश गोपी को मंत्री बनाकर भाजपा ने केरल के उन मतदाताओं का धन्यवाद किया है जिन्होंने पहली बार उसे इस राज्य में जीत दिलाने का काम किया है। भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन को भी केरल कोटे से मंत्री बनाया गया है। केरल में इसाई समुदाय को लुभाने के लिए जॉर्ज कुरियन को मंत्री बनाया गया है। रवनीत सिंह बिट्टू को चुनाव हारने के बाद भी राज्य मंत्री पद का शपथ दिलाया गया है। उनके ऊपर पंजाब में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।


पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से पहली बार जीतकर संसद पहुंचे भाजपा नेता हर्ष मल्होत्रा पंजाबी समुदाय से आते हैं। भाजपा संगठन के मजबूत नेता माने जाते हैं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम में मेयर रह चुके हैं और वे मंत्रिमंडल में वे दिल्ली का प्रतिनिधित्व करेंगे।

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