फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुजरात: सिगरेट से कैंसर का साक्ष्य नहीं, बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती कंपनी

Sun, 03 Oct 2021 04:15 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, अहमदाबाद।

सार

कंपनी का कहना था कि सिगरेट पीने वालों में कैंसर का खतरा 25 गुना अधिक होता है। इस पर बनर्जी की पत्नी स्मिता ने अहमदाबाद के उपभोक्ता आयोग में मुकदमा किया।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गुजरात की एक उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी को यह कहते हुए फेफड़े के कैंसर रोगी को मुआवजा देने के लिए कहा है कि सिगरेट पीने से कैंसर की पुष्टि का कोई साक्ष्य अब तक सामने नहीं आया है।

विज्ञापन


कंपनी ने इस व्यक्ति को यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था किवह सिगरेट पीता था। अब कंपनी को सात प्रतिशत ब्याज दर के साथ क्लेम राशि देनी होगी।

मामले में कंपनी ने पीड़ित आलोक बनर्जी का 93297 रुपये का अस्पताल बिल का दावा खारिज किया था। उन्हें ‘एडेनोकार्सिनोमा ऑफ लंग’ नामक कैंसर हुआ था। कंपनी ने उन्हें सिगरेट का आदी बताकर उनका दावा स्वीकार नहीं किया।
विज्ञापन


अपने आदेश में अदालत ने कहा कि किसी को सिगरेट पीने से कैंसर की पुष्टि कभी नहीं हो पाई है। इलाज से जुड़े कुछ अध्ययनों में ‘स्मोकिंग की लत’ का उल्लेख है लेकिन इसे फेफड़ों के कैंसर का आधार नहीं माना जा सकता।

जो सिगरेट नहीं पीते, उन्हें भी होता है कैंसर
आयोग अध्यक्ष केएस पटेल और सदस्य केपी मेहता ने अपने आदेश में कहा कि फेफड़े का कैंसर उन लोगों को भी होता है, जो सिगरेट नहीं पीते। ऐसे में बीमा दावा खारिज करना सही नहीं है।

मामला अगस्त, 2016 का है, लिहाजा याची को सात प्रतिशत सालाना ब्याज दर के साथ अस्पताल खर्च चुकाया जाए। उसे तीन हजार रुपये मानसिक परेशानी और दो हजार रुपये कानूनी खर्च के लिए भी दिए जाएं। इसके लिए बीमा कंपनी को 30 दिन का समय दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें