आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया की कोरोना के स्वरूप को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में वायरस के जीनोम को डिकोड किया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस नए स्वरूप की कोई भी पहचान अपने देश में नहीं हुई है लेकिन हम सबको अब बहुत ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है।
नेशनल कोविड टास्क फोर्स के डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि कोविड की वैक्सीन कोरोना के बदलते हुए किसी भी स्वरूप में कारगर है। इसलिए वैक्सीन को लेकर किसी भी प्रकार का कोई संशय किसी भी बदले वैरियंट के दौरान नहीं करना चाहिए। हालांकि हमारे वैज्ञानिक लगातार कोरोना के बदलते हुए स्वरूप और उससे जुड़े हुए सभी पहलुओं पर लगातार नजर बनाए रहते हैं। डॉक्टर अरोड़ा कहते हैं कि जितनी जल्दी टीकाकरण होता जाएगा, लोग उतने ज्यादा सुरक्षित होते जाएंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े साउथ एशिया के एक अधिकारी ने बताया कि जिन देशों में टीकाकरण का प्रतिशत सबसे ज्यादा है वहां पर कोरोना के बदले हुए स्वरूप का कोई भी बड़ा असर नहीं दिख रहा है।
कोरोना के बदलते हुए स्वरूप पर लगातार नजर रखने वाले देश के इंस्टीट्यूट आफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिकों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से और दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में तबाही मचाने वाले नए स्वरूप लैम्ब्डा को लेकर मिल रही जानकारियों को उनकी टीम लगातार फॉलो कर रही है। आईजीआईबी के वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक अपने देश में डेल्टा के अलावा और कोई भी खतरनाक वायरस का बदलता वैरियंट नहीं मिला है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की एडवाइजरी को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। खासतौर पर इंटरनेशनल कनेक्टिविटी वाले राज्यों और शहरों में विदेशों से आने वाले लोगों मैं अगर कोई लक्षण होते हैं तो उन पर खास नजर भी रखी जा रही है।