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राजधानी में ही अधूरा है स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य, खुले में शौच से अभी भी मुक्त नहीं हो पाई दिल्ली

Fri, 02 Oct 2020 06:06 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के 11,497 घरों में अभी भी नहीं हैं टॉयलेट
  • मेयर ने कहा- स्थाई और चालित शौचालयों को उपलब्ध कराकर खुले में शौच से मुक्त करने के काम जारी
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Jhuggis near Railway Track - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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आज से छह साल पहले दो अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत देश को खुले में शौच से मुक्ति पाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके अंतर्गत अब तक 4327 शहरी निकायों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसी क्रम में दिल्ली के सभी पांच शहरी निकायों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया था। लेकिन राजधानी के सामाजिक-आर्थिक सर्वे 2020 ने यह कहकर इस कार्यक्रम की पोल खोलकर रख दी कि दिल्ली के कम से कम 11,497 घरों में आज भी टॉयलेट्स नहीं हैं। इन परिवारों के लोग आज भी खुले में शौच करते हैं।

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हजारों घरों में टॉयलेट्स की सुविधा नहीं

सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी दिल्ली के 1907 घरों में टॉयलेट्स की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार दक्षिणी-पूर्वी जिले के 1744 घरों, पूर्वी दिल्ली के 1555 घरों, शहादरा जिले के 1460 घरों, उत्तरी-पश्चिमी जिले के 918 घरों, दक्षिणी जिले के 750 घरों और दक्षिणी-पश्चिमी जिले के 391 घरों में शौचालयों की कोई व्यवस्था नहीं है। सामान्य सोच के उलट ग्रामीण घरों में शौचालयों की स्थिति शहरी क्षेत्रों के घरों की तुलना में बेहतर बताई गई है। शौचालय विहीन 11,497 घरों मेें से केवल 7.7 फीसदी घर ग्रामीण इलाकों में आते हैं, जबकि शेष शहरी क्षेत्र में बने हुए हैं।

सबसे ज्यादा बुरी स्थिति यहां

खुले में शौच के मामले में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति अवैध कॉलोनी में बसे लोगों की है। निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास बनी मद्रास कॉलोनी, त्रिनगर, तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन के पास बसी अन्ना नगर कॉलोनी, सेवानगर बस्ती और आनंद विहार के पास अनेक ऐसे इलाके हैं, जहां भारी संख्या में आज भी लोग खुले में शौच करते हैं। सबसे विचित्र स्थिति यह है कि इनमें से अनेक जगहों पर मोबाइल टॉयलेट्स स्थापित किए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग खुले मेें शौच का इस्तेमाल करते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन से क्या हुआ हासिल

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक देश में 4377 शहरी निकायों को पूर्णतया खुले में शौच से मुक्त कराया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इन छह सालों में करोड़ों शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनमें छह लाख से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय और 66 लाख से अधिक प्राइवेट शौचालय शामिल हैं।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 1,319 शहर ओडीएफ+ और 489 शहर ओडीएफ++ घोषित किए जा चुके हैं। 2900 से अधिक शहरों के 59 हजार 900 शौचालयों की फीसदी कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है। ठोस कचरे के निस्तारण की क्षमता 2014 की तुलना में दो गुने से अधिक हो चुकी है।

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मेयर ने कहा- कर रहे इंतजाम

खुले में शौच के मामले में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति का सामना कर रहे उत्तरी नगर निगम के मेयर जय प्रकाश ने अमर उजाला को बताया कि उनके क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। लेकिन कुछ जगहों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग खुले में शौच रहे हैं। इससे पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए 20 चालित शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 20 अन्य प्रमुख जगहों पर नए सार्वजनिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष अभियान चलाकर पूरे निगम क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराया जायेगा।

पूर्वी दिल्ली के स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व नेता संदीप कपूर ने बताया कि निगम क्षेत्र के सभी इलाकों में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था की गई है, जिससे लोगों को खुले में शौच के लिए न जाना पड़े। शहादरा, यमुना नदी के निचले इलाकों में बसावट के आसपास और रेलवे पटरियों के आसपास खुले में शौच की कुछ शिकायतें पाई गई थीं, लेकिन इन सभी जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था की जा चुकी है। लोगों को निगम का साथ देकर शहर को साफ-स्वच्छ रखने में मदद करनी चाहिए।

संदीप कपूर ने कहा कि शहर को स्वच्छ रखने में सबसे बड़ी भूमिका कचरे के निस्तारण की होती है। अब पूर्वी दिल्ली नगर निगम लोगों के घरों से ही कचरे को उठाएगा। इससे सड़कों पर गंदगी नहीं मिलेगी। एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी लोगों के घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र करेंगे। इससे इन कचरों के निस्तारण में भी सुविधा रहेगी।

दक्षिणी दिल्ली के एक अधिकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा शिकायतें रेलवे पटरियों के आसपास बसी कालोनियों से आई हैं। इसे रोकने की कोशिश की जा रही है। पिछले वर्ष रात्रि पेट्रोलिंग की व्यवस्था कर लोगों को खुले में शौच की बजाय सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया था। इस वर्ष भी यह कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है।

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