एक कार्यबल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में बढ़ती खुदकुशी के मामलों के साथ ही आपसी गोलीबारी के हादसों पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। इस कार्यबल का गठन पिछले महीने पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने किया था और इसमें कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल है। पिछले दो दिनों के दौरान आपसी गोलीबारी में सात बीएसएफ जवानों की जान जा चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि कार्यबल न केवल जवानों द्वारा अपनी जिंदगी लेने वाले मामलों का अध्ययन और सिफारिश करेगा बल्कि एक दूसरे की जान लेने के मामलों पर भी रिपोर्ट तैयार करेंगे। पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई आपसी गोलीबारी के मामलों को इसमें शामिल किया जाएगा। कार्यबल ने पिछले ही हफ्ते बैठक की थी। एक अधिकारी ने बताया कि कार्य चल रहा है। पहले मसौदा रिपोर्ट तैयार की जाएगी और अंतिम टिप्पणी के लिए इसे सीएपीएफ के बीच बांटा जाएगा। इसके बाद इसे गृह मंत्रालय को सौंपा जाएगा।
कार्यबल की अध्यक्षता आईपीएस अधिकारी वीएसके कौमुदी कर रहे हैं। वह मंत्रालय में विशेष सचिव, आंतरिक सुरक्षा हैं। कार्यबल में बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल्स के विशेष/अतिरिक्त आईजी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। पिछले साल दिसंबर में गठित कार्यबल की अध्यक्षता पहले सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह कर रहे थे।
सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए दिसंबर 2021 के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-2021 के दौरान सीएपीएफ में आपसी गोलीबारी की 25 घटनाएं हो चुकी हैं। सबसे अधिक 11 मामले सीआरपीएफ और 9 मामले बीएसएफ में सामने आए। हालांकि इन घटनाओं में मृतकों की संख्या नहीं बताई गई। पिछले साल अगस्त में अपडेट किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह साल में केंद्रीय बलों के 680 जवानों ने खुदकुशी की। अब इनकी संख्या 700 के पार हो गई है। सीएपीएफ में 10 लाख से अधिक जवान-कर्मचारी कार्यरत हैं।