सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा मामला पंजाब से गुजरात अदालत भेजा
मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की बरामदगी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की याचिका स्वीकार कर ली है। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने आदेश दिया कि मुंद्रा एयरपोर्ट पर मादक पदार्थ बरामदगी से जुड़े हेरोइन तस्करी मामले को पंजाब के होशियारपुर की एक अदालत से गुजरात के अहमदाबाद की विशेष एनआईए अदालत में भेज दिया जाए।
न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की दलीलों पर ध्यान देते हुए यह आदेश दिया। उन्होंने अपनी दलीलों में कहा था कि गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से मादक पदार्थ बरामद किया गया था और संबंधित मामलों में दो अलग-अलग मुकदमों से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। गुजरात और पंजाब में अलग-अलग मुकदमे एनआईए के लिए गंभीर पूर्वाग्रह पैदा करेंगे।
बता दें कि इस ड्रग्स की बरामदगी को लेकर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने गुजरात में एक मामला दर्ज किया है और दूसरा मामला यहां साकेत की एक विशेष अदालत में लंबित है। वहीं, तीसरा मामला होशियारपुर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में लंबित है। एनआईए चाहती थी कि प्रभावी सुनवाई के लिए पंजाब मामले को भी अहमदाबाद स्थानांतरित किया जाए।
बता दें कि यह मामला सितंबर 2021 का है। जब डीआरआई अधिकारियों को मुंद्रा बंदरगाह पर टैल्क पाउडर की खेप में 2,988 किलोग्राम हेरोइन मिली थी। यह खेप अफगानिस्तान से आयात की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे सत्ता बदलने के छह सप्ताह बाद तक अपने वकीलों के पैनल को न बदलें क्योंकि इससे अदालत का काम प्रभावित होता है। निर्देशों की कमी के कारण सुनवाई स्थगित करनी पड़ती है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, पिछले कुछ महीनों के दौरान, इस अदालत ने देखा है कि एक राजनीतिक दल से दूसरे राजनीतिक दल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस अदालत में पेश होने वाले अपने अधिवक्ताओं के पैनल को बदल रहे हैं। इस कारण अदालत के लिए समय-समय पर सुनवाई स्थगित करनी पड़ती है।
पीठ ने कहा, “यह सच है कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अपने सूचीबद्ध अधिवक्ताओं को बदलने की शक्ति है लेकिन ऐसा करते समय उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि अदालत के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसलिए यह उचित होगा कि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सत्ता में बदलाव होने पर अधिवक्ताओं के पुराने पैनल को कम से कम छह सप्ताह तक जारी रखेगा ताकि अदालतें स्थगन देने के लिए मजबूर न हों। शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थायी वकील को आदेश की एक प्रति देने का भी निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ईवीएम में डाले गए वोटों का वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) से क्रॉस-सत्यापन की मांग वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिका को अगले हफ्ते मंगलवार या बुधवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे पहले याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मामले पर तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए। इसी मामले में पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि चुनाव नजदीक आ रहे हैं और अगर मामले की सुनवाई नहीं हुई तो याचिका निरर्थक हो जाएगी।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के साथ विशेष पीठ में बैठे जस्टिस खन्ना ने कहा कि अदालत स्थिति से अवगत है और अगले हफ्ते मामले की सुनवाई करेगी। जस्टिस खन्ना ने कहा कि प्रशांत भूषण, आखिर इस मामले में कितना समय लगेगा। आप दो घंटे में अपनी बात रख सकते हैं और हम मामले को खत्म कर देंगे। ठीक है। अगले सप्ताह इस पर सुनवाई करेंगे।