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SC: 'राज्यपाल कर रहे पद का दुरुपयोग', विधेयकों को मंजूरी न मिलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार

Tue, 31 Oct 2023 10:43 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्यपाल की ओर से मामलों को लंबित रखने के रवैये को लेकर पंजाब और तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। एमके स्टालिन सरकार ने राज्यपाल आरएन रवि और भगवंत मान की पंजाब सरकार ने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित पर सत्तारूढ़ पार्टियों के साथ बैर करने और चुनी गई सरकार के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में खुद को पेश करने का आरोप लगाया है। 
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राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तमिलनाडु सरकार ने राज्यपाल आरएन रवि पर मंजूरी के लिए भेजे गए बिलों में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने अदालत से राज्यपाल को एक समय सीमा के भीतर विधेयकों को मंजूरी देने या निपटाने का निर्देश देने का आग्रह किया।

पिछले कुछ महीनों से टकराव

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बता दें, डीएमके सरकार और तमिलनाडु के राज्यपाल के बीच पिछले कुछ महीनों से टकराव चल रहा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल रवि के बीच इससे पहले लंबित विधेयकों, स्टालिन की विदेश यात्राओं, शासन के डीएमके मॉडल और राज्य के नाम पर उनकी टिप्पणी को लेकर टकराव हो चुका है।

इन मामलों की फाइलें राज्यपाल के पास लंबित
सुप्रीम कोर्ट से अपने अनुरोध में तमिलनाडु सरकार ने दावा किया कि राज्य विधानसभा द्वारा भेजे जा रहे विधेयकों और आदेशों को राज्यपाल द्वारा समय पर मंजूरी नहीं दी जा रही है। सरकार ने कहा कि 12 विधेयक, चार अभियोजन मंजूरी और 54 कैदियों की समय से पहले रिहाई से संबंधित फाइलें राज्यपाल के पास लंबित हैं। सरकार ने राज्यपाल पर पद का दुरुपयोग करने और लोगों की इच्छा को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

राज्य के नाम पर टिप्पणी

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राज्यपाल रवि ने इस साल जनवरी में चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी टिप्पणी से राज्य के नाम पर बहस छेड़ दी थी। उन्होंने कहा था, ‘यहां तमिलनाडु में एक अलग तरह की कहानी गढ़ी गई है। पूरे देश को जो कुछ भी मंजूर है, तमिलनाडु उसे ना कहेगा। यह एक आदत बन गई है। सत्य की जीत होनी चाहिए। इसे कहने के लिए थामिझागम अधिक उपयुक्त शब्द होगा।’ बाद में राज्य के नाम बदलने को लेकर राज्यपाल की आलोचना होने लगी थी। इसपर उन्होंने सफाई दी थी कि यह अनुमान लगाना गलत है कि उन्होंने राज्य का नाम बदलने का सुझाव दिया था और राजभवन ने तमिलनाडु नाम का उपयोग करना शुरू कर दिया।

पंजाब सरकार बोली- तीन धन विधेयकों को नहीं दी मंजूरी
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित पर ऐसे ही आरोप लगाए। पंजाब सरकार की याचिका में कहा गया, पुरोहित ने राज्य विधानसभा से पारित 27 विधेयकों में से 22 को मंजूरी दे दी है। हाल ही में, तीन धन विधेयकों को उन्होंने मंजूरी नहीं दी। इन्हें विधानसभा के विशेष सत्र में पेश करने का प्रस्ताव था। पेश करने से पहले अनुमोदन के लिए विधेयक राज्यपाल के पास भेजे गए थे। मंजूरी न मिलने के कारण विशेष सत्र स्थगित करना पड़ा।

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