सेल्फी को कला, आत्ममुग्धता और समाज में बढ़ती निष्क्रियता का संकेत सहित तमाम तरह के नाम, उपमाएं और परिभाषाएं दी जा चुकी हैं। लेकिन, शोध में दावा किया गया कि जोखिमभरी सेल्फी लेना नासमझी में किया गया शौक नहीं, बल्कि एक जनस्वास्थ्य समस्या है। इससे बचाव के लिए स्पष्ट नियम और कायदे बनाकर इनके बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
सिडनी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के प्रोफेसर रॉब ब्रैंडर और शोधकर्ता एमी पेडेन ने शोध में पाया, अक्सर लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालकर वाहवाही बटोरने के लिए हदों को पार कर बेहद दूरदराज की दिलकश जगहों पर पहुंचते हैं और सेल्फी लेने के चक्कर में जान गंवा बैठते हैं। कुछ जगह, तो इस तरह के मामलों के लिए कुख्यात होने लगी हैं।
मसलन, अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में स्थित योसेमिटी राष्ट्रीय उद्यान, दुनियाभर के जलप्रपात, समुद्र तट, पहाड़ और ऊंची इमारतें, जहां लोग अक्सर सुरक्षा नियमों और निर्देशों को तोड़कर सेल्फी लेने की कोशिश में जान गंवाते हैं। 2008 से 2021 के बीच करीब 400 लोग जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा घायलों की संख्या हजारों में हैं।
भारत में समूह में जान गंवाते युवा
शोधकर्ताओं ने पाया कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में सेल्फी लेने के दौरान मौत के ज्यादातर मामलों में युवा अकेले होते हैं, जबकि इसके विपरीत भारत में समूह में जान गंवाते हैं। भारत में सबसे ज्यादा मौत जलाशयों के आसपास सेल्फी लेने के दौरान होती हैं।
दोषी न ठहराएं, सही और गलत समझाएं
कुछ दशक पहले तक बाइक पर बिना हेल्मेट और कार में बिना सीट बेल्ट लगाए चलना आम बात थी। इसे भी इसी तरह की समस्या के तौर पर लिया जाना चाहिए। जोखिमभरी सेल्फी लेने वाले मूर्ख या कमतर अक्ल वाले लोग नहीं, बल्कि किसी भी सामान्य आदमी की तरह हैं।
जागरूकता की जरूरत
प्रो. रॉब कहते हैं कि जोखिमभरी सेल्फी लेने की प्रवृत्ति को किसी भी दूसरी जनस्वास्थ्य या कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्या की तरह ही हल किए जाने की जरूरत है। इसमें जागरूकता सबसे अहम है। इसके अलावा ऐसी जोखिमभरी जगहों पर सुरक्षा निर्देश इस तरह से पेश किए जाएं कि सभी उन्हें समझ सकें। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्टिंग भी समस्या
आमतौर पर मीडिया रिपोर्टों में नासमझी करने वालों को मूर्ख बताया जाता है, लेकिन सुरक्षा और एहतियात के बारे में नहीं बताया जाता है। सेल्फी लेना करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हो चुका है। लिहाजा, किसी को जोखिमभरी सेल्फी लेने की वजह से मूर्ख कहना उचित नहीं। कई बार लोग उत्साह में भी गलती कर बैठते हैं। हालांकि, यह एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसके बारे में गंभीरता से रिपोर्टिंग की जरूरत है।
यह बरतें एहतियात
जब भी किसी ऐसी जगह जाएं, जहां मौसम बदलने से हालात बदलते हैं तो निकलने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। खराब मौसम में बाहर नहीं निकलें। अचानक मौसम बदले तो हालात बदलने से पहले ही सुरक्षित जगह पहुंच जाएं और मदद मांगने में देरी न करें।
- सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। सीमांकन का ध्यान रखें। जहां सुरक्षा चिह्न लगाए गए हैं उनपर गौर करें उनके मुताबिक ही व्यवहार करें। किसी भी बैरियर को पार न करें, क्योंकि वे आम लोगों की सुरक्षा के मकसद से ही लगाए गए हैं।
- जंगल में घूमने जाएं तो तय और सुरक्षित रास्तों पर ही चलें। कहीं, भटकें तो नया रास्ता खोजने के बजाय पहले से मौजूद रास्तों को खोजें और जल्दी से किसी ऐसे किनारे पर आने की कोशिश करें।
- पहाड़ों के सफर में याद रखें कि कभी भी किनारों के बहुत ज्यादा करीब न जाएं।
- अच्छे कमेंट और अधिक लाइकआपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं, लिहाजा जब भी कुछ ऐसा करें तो याद रखें कि साहस का मतलब जानबूझकर जान जोखिम में डालना नहीं होता।