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कांग्रेस में वामपंथी नेता: पार्टी में दंगल और नेताओं के बीच बहस- कन्हैया कुमार को लेने से फायदा होगा या नहीं

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 28 Sep 2021 01:52 PM IST

सार

कन्हैया कुमार के स्वागत के लिए कांग्रेस दफ्तर के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं। जिस पर लिखा हुआ है कन्हैया कुमार  का पार्टी में शामिल होने पर स्वागत है। लेकिन उनका ठीक से स्वागत होता उससे पहले कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने उनके पार्टी में शामिल होने पर सवाल उठा दिया है।
 
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कन्हैया कुमार और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
सीपीआई नेता कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही पार्टी में दंगल शुरू हो गया है। उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर पार्टी नेताओं की राय अलग-अलग बंट गई है। कोई इसे पार्टी के लिए फायदेमंद बता रहा है तो कोई पूछ रहा है, इससे क्या फायदा होगा?  कांग्रेस नेता और पंजाब से सासंद मनीष तिवारी ने किसी का नाम लिए बगैर तंज में सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी के पार्टी में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए हैं। कन्हैया कुमार गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजदूगी में कांग्रेस का चेहरा बनने जा रहे हैं। 

मनीष तिवारी ने 1973 में आई पुस्तक 'कम्युनिस्ट इन कांग्रेस' कुमारमंगलम थीसिस का हवाला देते हुए कहा है कि इसे फिर से पढ़ना फायदेमंद हो सकता है। जितनी अधिक चीजें बदलती हैं, उतनी ही वे शायद वैसी ही रहती हैं। इस ट्वीट के जरिए तिवारी ने कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर सवाल उठाया है। मनीष तिवारी, जी 23 (पार्टी नेतृत्व से नाराज और असंतुष्ट नेताओं का समूह) के उन नेताओं में से एक हैं जो पार्टी नेतृत्व के मुखर विरोधी माने जाते हैं। 


हालांकि कन्हैया कुमार की कांग्रेस में दिलचस्पी जगाने और उनकी राहुल गांधी से मुलाकात के पीछे बिहार से कांग्रेस के विधायक शकील अहमद खान की बड़ी भूमिका बताई जाती है। कुमार के पार्टी में आने के सवाल पर कांग्रेस विधायक ने कहा है कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े कई नेता अभी पार्टी में सक्रिय हैं, मैं खुद वामपंथी हूं, प्रियंका गांधी की टीम में जुड़े संदीप सिंह उसी पृष्ठभूमि के हैं। सवाल यह है कि निश्चित तौर पर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा रखने वाले उस विचारधारा को भी मानने को तैयार हैं तो विरोध कैसा? शकील अहद खान कहते हैं कन्हैया कुमार आंदोलन से निकले हुए नेता हैं और कांग्रेस को अभी हर दिन आंदोलन की जरूरत है, ऐसे में वे निश्चित तौर पर सिर्फ बिहार कांग्रेस में ही नहीं बल्कि पूरे देश में कांग्रेसियो के बीच ऊर्जा का प्रवाह करेंगे।

कांग्रेस को बहुत करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई एक दूसरे पक्ष पर रोशनी डालते हैं। उनका कहना है कांग्रेस और वाम विचारधारा को लेकर कभी कोई कलह नहीं रहा है। वाम सोच का कांग्रेस से कोई ‘ना-ना’ का रिश्ता नहीं है। पिछली सरकारों का इतिहास देखें वाम दलों ने अक्सर कांग्रेस का साथ ही दिया है। महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस सहयोगी हैं, इसलिए कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को इसे पार्टी की राजनीतिक कौशलता का पैमाना माना जाना चाहिए।
 
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कन्हैया कुमार और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
सीपीआई नेता कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही पार्टी में दंगल शुरू हो गया है। उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर पार्टी नेताओं की राय अलग-अलग बंट गई है। कोई इसे पार्टी के लिए फायदेमंद बता रहा है तो कोई पूछ रहा है, इससे क्या फायदा होगा?  कांग्रेस नेता और पंजाब से सासंद मनीष तिवारी ने किसी का नाम लिए बगैर तंज में सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी के पार्टी में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए हैं। कन्हैया कुमार गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजदूगी में कांग्रेस का चेहरा बनने जा रहे हैं। 

मनीष तिवारी ने 1973 में आई पुस्तक 'कम्युनिस्ट इन कांग्रेस' कुमारमंगलम थीसिस का हवाला देते हुए कहा है कि इसे फिर से पढ़ना फायदेमंद हो सकता है। जितनी अधिक चीजें बदलती हैं, उतनी ही वे शायद वैसी ही रहती हैं। इस ट्वीट के जरिए तिवारी ने कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर सवाल उठाया है। मनीष तिवारी, जी 23 (पार्टी नेतृत्व से नाराज और असंतुष्ट नेताओं का समूह) के उन नेताओं में से एक हैं जो पार्टी नेतृत्व के मुखर विरोधी माने जाते हैं। 

हालांकि कन्हैया कुमार की कांग्रेस में दिलचस्पी जगाने और उनकी राहुल गांधी से मुलाकात के पीछे बिहार से कांग्रेस के विधायक शकील अहमद खान की बड़ी भूमिका बताई जाती है। कुमार के पार्टी में आने के सवाल पर कांग्रेस विधायक ने कहा है कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े कई नेता अभी पार्टी में सक्रिय हैं, मैं खुद वामपंथी हूं, प्रियंका गांधी की टीम में जुड़े संदीप सिंह उसी पृष्ठभूमि के हैं। सवाल यह है कि निश्चित तौर पर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा रखने वाले उस विचारधारा को भी मानने को तैयार हैं तो विरोध कैसा? शकील अहद खान कहते हैं कन्हैया कुमार आंदोलन से निकले हुए नेता हैं और कांग्रेस को अभी हर दिन आंदोलन की जरूरत है, ऐसे में वे निश्चित तौर पर सिर्फ बिहार कांग्रेस में ही नहीं बल्कि पूरे देश में कांग्रेसियो के बीच ऊर्जा का प्रवाह करेंगे।

कांग्रेस को बहुत करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई एक दूसरे पक्ष पर रोशनी डालते हैं। उनका कहना है कांग्रेस और वाम विचारधारा को लेकर कभी कोई कलह नहीं रहा है। वाम सोच का कांग्रेस से कोई ‘ना-ना’ का रिश्ता नहीं है। पिछली सरकारों का इतिहास देखें वाम दलों ने अक्सर कांग्रेस का साथ ही दिया है। महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस सहयोगी हैं, इसलिए कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को इसे पार्टी की राजनीतिक कौशलता का पैमाना माना जाना चाहिए।
 

जिग्नेश मेवानी के साथ कन्हैया कुमार - फोटो : social media
वैसे मनीष तिवारी अकेले ऐसा नेता नहीं है जो कन्हैया कुमार के पार्टी में शामिल होने पर ‘खुश’ नहीं दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ और वरिष्ठ और पुराने नेताओं को ऐसा लगता है कि इस वामपंथी नेता के पार्टी में शामिल होने से फायदे की जगह नुकसान ज्यादा होगा। 

कांग्रेस में कुछ लोगों को कन्हैया कुमार को उन्हें पार्टी में लाने पर इसलिए ऐतराज है क्योंकि उन्हें 2016 में आतंकवादी अपराधी अफजल गुरु की फांसी के बाद कथित तौर पर "आजादी" के नारे लगाने और देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पार्टी के भीतर कुछ लोगों को डर है कि भाजपा के साथ राष्ट्रवादी टैग जुड़ा हुआ है और ऐसे में कुमार के कथित राष्ट्रविरोधी नारों की इमेज के कारण कांग्रेस बैकफुट पर आ सकती है। ऐसे में उनके कांग्रेस में शामिल होने से यह कहानी फिर से शुरू हो सकती है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय है कि कुमार अपने विवादास्पद अतीत को लेकर अभी कई कांग्रेस में भी संदेह के घेरे में रहेंगे।  

हालांकि कांग्रेस नेता राशिद अल्वी इससे इत्तिफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस को मजबूत करना बहुत जरूरी है। यदि कांग्रेस कमजोर होगी तो देश कमजोर हो जाएगा, इसलिए पार्टी में ऐसे लोगों को शामिल करने का स्वागत किया जाना चाहिए जो अंदर से कांग्रेस को मजबूत करें। 

कन्हैया कुमार का अतीत उनका पीछा छोड़ेगा?    
सूत्रों के मुताबिक पुराने कांग्रेसी पार्टी नेतृत्व के इस फैसले को सही नहीं मानते हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक कन्हैया कुमार के आने से फायदा तो कुछ नहीं होगा। नुकसान ज्यादा होगा। उन्के मुताबिक इस वामपंथी नेता का जो अतीत है उसे लेकर सोशल मीडिया पर बहुत बातें हो चुकी हैं। उनकी इमेज टुकड़े-टुकड़े गैंग वाली बनी हुई है। वे चाहें व्यक्तिगत रूप से कितने भी ईमानदार हों लेकिन राजनीति में इमेज बहुत मायने रखती है। एक बार इमेज बिगड़ गई हो तो राजनीति में ऐसे लोगों का भविष्य ज्यादा और निश्चित नहीं होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि उनके अतीत के कारण कन्हैया कुमार के आने से पार्टी को नुकसान ज्यादा सहना पड़ेगा।

 

कन्हैया कुमार-गिरिराज सिंह - फोटो : social Media
बिहार कांग्रेस में उत्साह नहीं
सूत्रों के मुताबिक बिहार कांग्रेस में भी कन्हैया कुमार के शामिल होने को लेकर कोई उत्साह नहीं दिख रहा है। कुमार भूमिहार जाति से आते हैं लेकिन उनके समुदाय के ही कई नेता उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर उत्साहित नजर नहीं आते। एक भूमिहार नेता ने कहा, उनके पार्टी में शामिल होने से क्या हो जाएगा, वे केवल युवाओं में सोशल मीडिया पर लोकप्रिय है लेकिन उनका कोई जनाधार नहीं है। 

बिहार कांग्रेस से जुड़े एक पार्टी नेता ने कहा ‘झुकना कन्हैया कुमार को आता नहीं और अपने आक्रमक रवैए और पुराने अतीत की वजह से कांग्रेस के लिए भविष्य में बोझ बन सकते हैं।‘ हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर कहते हैं ‘ कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने से पूरे बिहार को ही नहीं पार्टी को पूरे हिंदुस्तान में इसका फायदा मिलेगा। वे युवाओं के बीच उनकी जिस तरह की लोकप्रियता है उससे पार्टी को छात्रों और युवाओं को जोड़ने में मदद मिलेगी’। 

राजनीति में अच्छा वक्ता होना पर्याप्त नहीं
वहीं रशीद किदवई की राय यह है कि राजनीति में एक सिद्धांत की बात है और एक जमीन हकीकत की। कांग्रेस जब सत्ता में थी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के फैसलों ने मध्यम वर्ग को बहुत राहत पहुंचाई थी। लेकिन वो मध्यम वर्ग राजनीतिक रूप से कांग्रेस से अब कट गया है। अब उन्हें भाजपा और मोदी में अपना भविष्य नजर आता है। पर अभी भी समाज में आर्थिक रूप से वंचित युवा हैं, छात्र, किसान समुदाय है और कन्हैया कुमार जैसे नेता जो बहुत नीचे से आए हैं वे उस समूह को अपनी तरफ आकर्षित कर लें तो कांग्रेस को बहुत फायदा हो सकता है।

हालांकि वे यह भी मानते हैं कि भारतीय राजनीति में एक वक्ता होना अनिवार्य है लेकिन यही गुण पर्याप्त नहीं है, कन्हैया कुमार ने अपनी वाकपटुता और अच्छे वक्ता होने का लोहा तो मनवाया है लेकिन उन्हें अपना जनाधार पैदा करना होगा। कांग्रेस एक बड़ा टेंट है, वे इस प्लेटफॉर्म का फायदा उठा सकते हैं, लेकिन एकदम से कोई बदलाव होगा, ऐसा कहना मुश्किल है।

युवाओं में लोकप्रिय है  कुमार
कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय के हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई और सीपीआई के टिकट पर गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। वाकपटु और भाषणकला में माहिर कन्हैया कुमार युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। उन्हें देश भर के छात्रों का बड़ा समर्थन हासिल है। वे शुरू से कि कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपनी छात्र राजनीति भी इसी विचारधारा से की। जिस बेगूसराय के विहाट गांव से वो आते है वो वामपंथियों का गढ़ माना जाता है।

 

 
 
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