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Supreme Court: कृष्ण जन्मभूमि पर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज; गौतम नवलखा को भी राहत नहीं

Fri, 05 Jan 2024 11:43 AM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है, जिसमें मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद स्थल को कृष्ण जन्मभूमि के रूप में मान्यता देने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्टके उस फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि जन्मस्थान का अधिग्रहण करने और उसे पूजा के लिए हिंदुओं को सौंपने का निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज किया था। हाईकोर्ट के 11 अक्तूबर 2023 के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में एक से ज्यादा मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए।

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याचिकाकर्ता महक माहेश्वरी के वकील ने कहा कि कोर्ट ने भी मुकदमे लंबित होने के आधार पर जनहित याचिका खारिज कर दी थी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर की थी और इसलिए इसे खारिज किया गया था। माहेश्वरी ने अपनी जनहित याचिका में कहा था कि वह एक समर्पित हिंदू हैं और प्रार्थना करते हैं कि पूजा करने के उनके मौलिक अधिकार को संरक्षित किया जाए।

supreme court - फोटो : ANI
केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-महाराष्ट्र और हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना, जिसमें राज्य में हलाल-प्रमाणित उत्पादों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, को भी रद्द करने की मांग की गई है।

Supreme Court - फोटो : ANI
गौतम नवलखा को झटका
एल्गार परिषद मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा को जमानत देने के फैसले के क्रियान्वयन पर बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को बढ़ा दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष पेश करने का भी निर्देश दिया, ताकि याचिका को अन्य आरोपियों के मामलों के साथ टैग करने पर निर्णय लिया जा सके। 

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर को नवलखा को जमानत दे दी थी, लेकिन एनआईए द्वारा शीर्ष अदालत में अपील दायर करने के लिए समय मांगने के बाद अपने आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। अगस्त 2018 में गिरफ्तार किए गए नवलखा को पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने घर में नजरबंद करने की अनुमति दी थी। वह वर्तमान में नवी मुंबई में रह रहे हैं। मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि इन भड़काऊ भाषणों की वजह से अगले दिन पश्चिमी महाराष्ट्र शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी।

डिजिटल उपकरणों की तलाशी पर दिशानिर्देशों को लेकर केंद्र को नोटिस

डिजिटल उपकरणों की तलाशी के लिए दिशा-निर्देशों की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीआई और ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियों से जवाब मांगा हैं। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया है क्योंकि इसी तरह का मुद्दा उठाने वाली अन्य याचिकाओं पर अदालत ने विचार किया है और वर्तमान में लंबित हैं।

केंद्र ने अदालत को आश्वासन दिया था कि जब तक नए दिशा-निर्देश लागू नहीं हो जाते, केंद्रीय जांच एजेंसियां ऐसे उपकरणों की खोज और जब्ती के लिए सीबीआई मैनुअल का पालन करेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सात नवंबर को केंद्र से व्यक्तियों, विशेषकर मीडिया पेशेवरों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने को कहा था।

पिछले साल 19 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ न्यूजक्लिक के संस्थापक और उसके एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती की अलग-अलग याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।

मानहानि केस में तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई स्थगित 

अहमदाबाद की एक मजिस्ट्रेट अदालत में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि की शिकायत को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई 22 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी हैं। 

दो सदस्यीय पीठ ने मामले को तब टाल दिया जब तेजस्वी यादव की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने अपने मुवक्किल द्वारा की गई कथित टिप्पणियों को वापस लेने पर एक हलफनामा दायर करने के लिए निर्देश मांगने के लिए समय मांगा। शीर्ष अदालत ने राजद नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले आपराधिक मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और इसे दायर करने वाले गुजरात निवासी को नोटिस जारी किया था। गौरतलब है कि कथित आपराधिक मानहानि के लिए तेजस्वी यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 और 500 के तहत शिकायत दर्ज की गई थी।

शिकायत के मुताबिक तेजस्वी यादव ने मार्च 2023 में पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा था, वर्तमान स्थिति में केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं और उनकी धोखाधड़ी को माफ कर दिया जाएगा।
 

सुप्रीम कोर्ट  ने खारिज की सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु के  मंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका 
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें ’नौकरी के बदले नकदी घोटाले’ में गिरफ्तार तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी को राज्य मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की गई थी।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने ये आदेश दिया। पीठ ने कहा कि अदालत हाईकोर्ट के विचार से सहमत है और इसमें किसी तरह से हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि राज्यपाल मुख्यमंत्री की सिफारिश के बिना किसी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकते।

कार्यकर्ता एमएल रवि की ओर से शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें वी सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी के बावजूद तमिलनाडु सरकार में मंत्री पद पर बने रहने के खिलाफ याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया गया था।

 मुफ्त के वादों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को सूचीबद्ध किया जाएगा
सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को चुनाव पूर्व मुफ्त सुविधाएं देने का वादा करने की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमति दे दी है। 

 मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से आग्रह किया कि मामले आंशिक रूप से सुने गए हैं और इस पर निर्णय लेने की आवश्यकता है।
इस पर सीजेआई ने कहा कि हम इसे देखेंगे। इन याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग इन पार्टियों के चुनाव चिह्नों को जब्त करने और उनका पंजीकरण रद्द करने की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव पूर्व मुफ्त उपहार देने का वादा करने की प्रथा अब अस्तित्व में नहीं है।

 कैश-फॉर-वोट मामले में रेवंत रेड्डी की याचिका पर सुनवाई फरवरी में
 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की याचिका पर सुनवाई फरवरी तक के लिए टाल दी। कैश फॉर वोट मामले में वह आरोपी हैं।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई इसलिए स्थगित कर दी, क्योंकि मामले से जुड़े वकीलों में से एक के परिवार में किसी का निधन हो गया था। शोक की सूचना मिलने के बाद पीठ ने रेड्डी की दायर याचिका सहित कई अन्य याचिकाओं की सुनवाई स्थगित करना उचित समझा। दरअसल, 31 मई 2015 को रेवंत रेड्डी को विधान परिषद चुनावों में टीडीपी उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी का समर्थन करने के लिए नामांकित विधायक एल्विस स्टीफेंसन को 50 लाख रुपये की रिश्वत देते समय एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया था। रेड्डी के अलावा कुछ अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हुई थी। बाद में सभी को जमानत दे दी गई थी। जुलाई 2015 में, एसीबी ने रेड्डी और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप पत्र दायर किया था। रेड्डी ने मुकदमा चलाने के लिए एसीबी की विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने वाली याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रेड्डी ने 1 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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ज्ञानवापी: याचिका पर जल्द सुनवाई पर विचार को सुप्रीम कोर्ट राजी
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को ज्ञानवापी परिसर में कथित शिवलिंग वाली जगह पर पानी की टंकी की सफाई के लिए हिंदू महिलाओं के एक समूह की याचिका पर जल्द सुनवाई पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। अदालत की ओर से नियुक्त आयुक्त के सर्वेक्षण के दौरान परिसर में एक ‘शिवलिंग’ पाए जाने का दावा किया गया था। महिला याचिकाकर्ताओं ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा का अधिकार मांगा है जबकि मुस्लिम पक्ष ने ‘शिवलिंग’ को फव्वारा बताया है। गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने की मांग पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी।
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