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सुप्रीम कोर्ट: पुजारी नहीं हो सकता मंदिर का मालिक, भू-राजस्व में देवता के नाम ही होगी सम्पत्ति 

Tue, 07 Sep 2021 02:46 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पुजारी एक किराएदार की तरह काम करता है। वह काश्तकार नहीं होता। जो भी पुजारी होगा वह मंदिर का प्रबंधन करेगा, उसकी देखभाल करेगा। कानून में देवता की मान्यता विधिसम्मत है, इसलिए मंदिर की सम्पत्ति देवता के ही नाम रहेगी। 
 
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supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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भू-राजस्व के रिकॉर्ड में पुजारियों के नाम जोड़े जाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि एक पुजारी किसी भी मंदिर की जमीन या सम्पत्ति का मालिक नहीं हो सकता। वह सिर्फ एक सेवक की तरह काम करता है। मंदिर की सम्पत्ति का मालिक उसका देवता ही होता है। 

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भू-राजस्व से पुजारियों के नाम हटाने के आदेश 
जस्टिस हेमंत गुप्ता व एएस बोपन्ना की बेंच ने कहा कि पुजारी के पास मंदिर या मंदिर की सम्पत्ति केवल प्रबंधन के लिए ही होती है। वह सिर्फ देवता की जगह पर उस मंदिर में काम करता है। चूंकि, देवता का नाम कानून में विधि सम्मत है इसलिए भू राजस्व के रिकॉर्ड में देवता के नाम ही मंदिर की सम्पत्ति रखी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही भू-राजस्व के रिकॉर्ड से पुजारियों के नाम हटाने के भी आदेश दिए हैं। 

किराएदार जैसा है पुजारी
कोर्ट ने कहा कि पुजारी उस जमीन की सिर्फ देखभाल करता है। वह सिर्फ एक किराएदार जैसा है। जो भी पुजारी होगा व मंदिर के देवताओं की देखभाल के साथ उससे जुड़ी जमीन पर खेती का काम भी करेगा।
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बरकरार रखा मध्य प्रदेश का सर्कुलर 
मध्य प्रदेश के 1959 के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सर्कुलर को बरकरार रखा है। इस सर्कुलर में पुजारियों के नाम भू राजस्व के रिकॉर्ड से हटाने के आदेश दिए गए थे, जिससे मंदिर की सम्पत्ति को अवैध रूप से बेचे जाने से बचा जा सके। 

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