सुप्रीम कोर्ट ने एक युगल और उनके दो बच्चों को जबरन ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ मध्य प्रदेश की एक अदालत में आपराधिक मुकदमे पर शुक्रवार को रोक लगा दी। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुकदमे पर रोक का विरोध करते हुए कहा कि इससे मामले की कार्यवाही में देरी होगी जो बहुत गंभीर मुद्दे से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक युगल और उनके दो बच्चों को जबरन ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ मध्य प्रदेश की एक अदालत में आपराधिक मुकदमे पर शुक्रवार को रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इस तथ्य पर कड़ा संज्ञान लिया कि स्थानीय अदालत ने मध्य प्रदेश के वकील द्वारा पहले दिए गए वादे के बावजूद सुनवाई जारी रखी।
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दलीलों में वकीलों ने कही यह बात
मामले में मध्य प्रदेश राज्य की ओर से पेश वकील वीर विक्रांत सिंह ने कहा था कि 5 जनवरी 2024 तक मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए कोई और कदम नहीं उठाया जाएगा। शुक्रवार को सिब्बल ने पीठ को बताया कि 15 दिसंबर को मध्य प्रदेश के वकील द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद स्थानीय अदालत ने मुकदमा आगे बढ़ाया है।
याचिका के निपटारे तक आगे की कार्यवही पर रोक लगाएंगे- सीजेआई
पीठ ने यह भी पूछा कि इस मामले में मानव तस्करी का अपराध (आईपीसी की धारा 370 के तहत) कैसे लागू होता है, क्योंकि ऐसा कोई आरोप ही नहीं था। सीजेआई ने कहा, हम याचिका के निपटारे तक आगे की कार्यवाही (ट्रायल कोर्ट में) पर रोक लगाएंगे। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत भ्रम को दूर करने के लिए यह आदेश पारित कर रही है।सॉलिसिटर जनरल ने कहा, यह गंभीर मामला इसमें देरी होगी।
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मुकदमे पर रोक का किया सॉलिसिटर जनरल ने विरोध
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुकदमे पर रोक का विरोध करते हुए कहा कि इससे मामले की कार्यवाही में देरी होगी जो बहुत गंभीर मुद्दे से संबंधित है। मेहता ने कहा कि वह सुनवाई आगे बढ़ाने के निचली अदालत के फैसले का बचाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन शीर्ष अदालत में याचिका के निपटारे तक कार्यवाही पर रोक से अनावश्यक देरी होगी।
15 दिसंबर, 2023 को पहली बार हुई थी सुनवाई
दरअसल, पीठ ने 15 दिसंबर, 2023 को पहली बार मामले में अपने अभियोजन को चुनौती देने वाली ईसाई मिशनरी अजय लाल की याचिका पर सुनवाई की थी। लाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर ध्यान देने के बाद, पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किया था। इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने आश्वासन दिया था कि पांच जनवरी 2024 तक मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।