पराली जलाने से रोकने में पंजाब व हरियाणा सरकार के उदासीन रवैये से खफा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसरो राज्य को पराली जलाने की जगह के बारे में बताता है और अधिकारी कहते हैं कि आग लगने की जगह नहीं मिली। पीठ ने कहा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य विशेषज्ञ नहीं हैं।
पंजाब के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कहा कि राज्य में धान की खेती के कारण बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान हो रहा है। इस पर पीठ ने पूछा, कृपया हमें बताएं कि 2013 की अधिसूचना को लागू करने, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दायर करने से क्या वित्तीय निहितार्थ जुड़े हैं? सिंह ने स्पष्ट किया कि इसमें कोई वित्तीय निहितार्थ नहीं है, लेकिन किसान कानून-व्यवस्था की बहुत सारी समस्याएं पैदा कर रहे हैं और उन्हें बातचीत में शामिल करना होगा। शीर्ष कोर्ट पर्यावरणविद एमसी मेहता की लंबित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
पीठ ने कहा, हम सीएक्यूएम के सदस्यों व उनकी योग्यता का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन वे प्रदूषण के क्षेत्र में योग्य या विशेषज्ञ नहीं हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सदस्यों में से एक छह साल तक मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस पर पीठ ने कहा, राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नेतृत्व करने की कोई योग्यता नहीं है। आप जानते हैं कि बोर्ड कैसे काम करते हैं। सीएक्यूएम को प्रदूषण के मुद्दे को सुलझाने के लिए कुछ विशेषज्ञ एजेंसियों से जुड़ना चाहिए।