सुप्रीम कोर्ट ने अदाणी पावर (मुंद्रा) लिमिटेड को शीर्ष अदालत के ही 2019 के एक फैसले के खिलाफ दायर उस क्यूरेटिव पिटीशन पर तीन हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है, जिसमें कंपनी को गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) के साथ बिजली खरीद समझौते को समाप्त करने को सही ठहराया था।
चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने जीयूवीएनएल को अदाणी पावर का जवाब मिलने बाद दो सप्ताह के भीतर अपना अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अदाणी पावर की ओर से पेश वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्हें जवाब और मामले में कुछ दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय चाहिए। जीयूवीएनएल का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और वकील सीए सुंदरम ने कहा कि अदाणी पावर के जवाब पर वे भी अपना जवाब देना चाहेंगे। इस पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
जुलाई 2019 में जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त), जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि अदाणी पावर का पीपीए को समाप्त करना उचित था, क्योंकि उसे गुजरात मिनरल विकास निगम (जीएमडीसी) के नैनी ब्लॉक से समय पर कोयले की आपूर्ति नहीं मिल सकी। 16 सितंबर को शीर्ष अदालत ने फैसले के खिलाफ दायर क्यूरेटिव पिटीशन पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए कहा था कि इसमें कानून के प्रश्न हैं जिन पर विचार करने की आवश्यकता है।