सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि तब्लीगी जमात में शामिल होने वाले उन विदेशियों को उनके देश वापस भेजने में सहायता करें जिन्हें अदालत द्वारा आरोपमुक्त कर दिया गया है। दरअसल पिछले दिनों 14 देशों के 36 विदेशी तब्लीगी जमात के सदस्यों को कोविड-19 के दिशानिर्देशों के उल्लंघन करने के आरोप से निचली अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया था।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह आरोपमुक्त हुए इन विदेशी तब्लीगी जमातियों के आवेदन को रिकॉर्ड पर लेने के बाद उन्हें उनके देश भेजने में सहायता प्रदान करें। पीठ ने सरकार को नोडल अधिकारी भी नियुक्त करने के लिए कहा है, जो इन लोगों की मदद करेंगे। पीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ता नोडल अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन कर सकते हैं। नोडल अधिकारी कानून के तहत उनकी मदद करेंगे। वास्तव में तब्लीगी जमात के सदस्यों ने आरोपमुक्त होने के बाद वापस अपने वतन जाने के लिए आवेदन दिया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने पीठ से कहा कि 36 विदेशी तब्लीगी को आरोपमुक्त किया गया है, लिहाजा इन सभी को उनके देश भेजने की व्यवस्था की जाए। जिसके बाद पीठ ने कहा कि सरकार को इन सभी को वापस देश भेजने में सहायता करनी चहिए।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष कहा कि जिन विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया है उन्हें अगर विदेश जाने में परेशानी है तो उनके वकील चाहें तो उनके ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं ताकि सहायता दी जा सके।
गत 15 दिसंबर को चीफ मेट्रोपॉलिटिन मैजिस्ट्रेट एके गर्ग की अदालत ने 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त कर दिया था और कहा था कि उनके खिलाफ कोरोना महामारी फैलाने संबधित आरोपों को लेकर कोई सबूत नहीं है।
मालूम हो कि गत मार्च में दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था, इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी थे। बाद में उनमें से सैकड़ों लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। उस वक्त उन पर कोविड-19 के दिशानिर्देशों का उल्लंघन व देश में कोरोना फैलाने का आरोप लगाए गए थे। इन जमात के लोगों को बहुत बदनाम करने के आरोप भी लगे थे। कई विदेशी लोगों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था।
घटना के बाद कई मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया गया। आरोप लगाया गया था कि कुछ मीडिया द्वारा इससे जुड़ी खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और पूरे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा का वातावरण पैदा कर समाज में तनाव बढाने की कोशिश की गई।